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‘लोन के साथ जबरन बीमा बेचा तो खैर नहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बैंकों को सख्त चेतावनी

by Bhupendra Sahu

नई दिल्ली । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि उन्हें अपने मूल काम पर ध्यान देना चाहिए, न कि ग्राहकों को जबरन बीमा जैसे उत्पाद बेचने (मिस-सेलिंग) में समय लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मिस-सेलिंग एक अपराध है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बजट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय निदेशक मंडल के साथ बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री ने कहा कि वह लगातार मिस-सेलिंग के मुद्दे को उठाती रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई ग्राहक घर के लिए लोन लेने आता है और उसके पास पर्याप्त गारंटी (कोलेटरल) है, तो उसे अतिरिक्त बीमा पॉलिसी लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
सीतारमण ने कहा कि उन्हें खुशी है कि आरबीआई ने बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मिस-सेलिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैंकों को अपना मुनाफा लोन देने और जमा जुटाने जैसे मुख्य कार्यों से कमाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि बैंकों को चालू खाता और बचत खाता (सीएएसए) जमा बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पहले जब बैंक अतिरिक्त धन की मांग लेकर आए थे, तब उन्होंने साफ कहा था कि बैंकों को सीधे पैसा देने के बजाय सीएएसए के माध्यम से संसाधन जुटाने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
वित्त मंत्री ने अमेरिका द्वारा हाल में घोषित टैरिफ (आयात शुल्क) बदलावों पर कहा कि इसके प्रभाव पर अभी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय स्थिति की समीक्षा कर रहा है और आगे की व्यापार वार्ताओं पर निर्णय प्रतिनिधिमंडल द्वारा लिया जाएगा।
हाल ही में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा की। बाद में इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए होने वाली बैठक को फिलहाल पुनर्निर्धारित किया गया है।
सीतारमण ने कहा कि भारत वैश्विक व्यापार समझौतों के लिए प्रतिबद्ध है और ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ पहले ही समझौते कर चुका है। भारत आगे भी वैश्विक बाजारों से जुड़कर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहता है।
वित्त मंत्री ने सोने की बढ़ती कीमतों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हाल में सोने की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने और चांदी की खरीद बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि भारतीय परिवारों के लिए सोना हमेशा एक पसंदीदा निवेश रहा है और त्योहारी सीजन में इसकी मांग बढ़ जाती है।
सीतारमण ने भरोसा दिलाया कि सरकार और आरबीआई स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि फिलहाल सोने की कीमतों में बढ़ोतरी चिंताजनक स्तर तक नहीं पहुंची है।

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