Home » अब कटने-बंटने के दिन गए, आरएसएस चीफ मोहन भागवत का बड़ा बयान; आरक्षण, लिव-इन और यूसीसी पर रखी बेबाक राय

अब कटने-बंटने के दिन गए, आरएसएस चीफ मोहन भागवत का बड़ा बयान; आरक्षण, लिव-इन और यूसीसी पर रखी बेबाक राय

by Bhupendra Sahu

देहरादून  । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (क्रस्स्) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने देश के बंटवारे, आरक्षण, समान नागरिक संहिता (ष्टष्ट) और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे ज्वलंत मुद्दों पर बेबाक राय रखी है। देहरादून के हिमालयन कल्चरल सेंटर में ‘संघ यात्रा-नये क्षितिज, नये आयामÓ विषय पर आयोजित एक प्रमुख जन गोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में अब कटने और बंटने के दिन पूरी तरह से जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 के विभाजन जैसी त्रासदी को अब दोबारा किसी भी परिस्थिति में दोहराने नहीं दिया जाएगा, क्योंकि आज समाज और राष्ट्र दोनों पूरी तरह से जागृत हो चुके हैं और पूरी दुनिया भारत को नेतृत्व की भूमिका में देख रही है।
जब तक मन में भेदभाव, तब तक जारी रहे आरक्षण
समाज में समानता और आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए आरएसएस प्रमुख ने साफ किया कि देश में आरक्षण बराबरी लाने के लिए ही लागू किया गया था। उनका स्पष्ट मानना है कि जब तक लोगों के मन और व्यवहार में सामाजिक विषमता या भेदभाव बना रहेगा, तब तक समाज में अदृश्य छुआछूत चलती रहेगी। इसलिए, जब तक समाज के मन से यह भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक आरक्षण व्यवस्था को जारी रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि हजारों साल पुरानी इस समस्या का स्थायी समाधान केवल नियम-कानूनों से नहीं, बल्कि सच्चे सामाजिक सद्भाव से ही निकलेगा। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वर्गीकरण में बंटने के बजाय सभी एकजुट होकर रहें।
जनसंख्या कानून और महिलाओं के लिए 50 फीसदी कोटे का समर्थन
जनसंख्या नियंत्रण और समान अधिकारों की वकालत करते हुए डॉ. भागवत ने जनसंख्या कानून की जरूरत पर बल दिया और तीन बच्चों की बात का समर्थन किया। उन्होंने उत्तराखंड सरकार द्वारा लागू की गई समान नागरिक संहिता (ष्टष्ट) की पहल की जमकर सराहना की और इसे समाज को एकजुट करने वाला बेहतरीन कदम बताते हुए पूरे देश में लागू किए जाने का समर्थन किया। इसके साथ ही, महिला सशक्तिकरण पर बड़ा बयान देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं समाज की आधी आबादी और शक्ति हैं, इसलिए उन्हें केवल 33 प्रतिशत नहीं बल्कि पूरे 50 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार मिलना चाहिए।
‘लिव-इनÓ संस्कृति को बताया अस्वीकार्य, नई पीढ़ी को दी नसीहत
पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए सरसंघचालक ने ‘लिव-इन रिलेशनशिपÓ को भारतीय समाज के लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना विवाह के उपभोग तो सिर्फ जानवरों में होता है, इसलिए आज के युवाओं को विवाह जैसी संस्था की सामाजिक जिम्मेदारी उठानी ही होगी। इसके अलावा, नई पीढ़ी (जेन-जी) और बढ़ती तकनीक पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के साथ प्रामाणिकता से पेश आना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक को मानव संस्कारों और मनुष्यता की कीमत पर कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने सभी परिवारों से घरों में अपना स्क्रीन टाइम भी संयमित रखने का खास आह्वान किया।
00

Share with your Friends

Related Articles

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More