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विशेष आलेख : जनजातीय खिलाड़ियों के लिए शानदार मंच साबित हुआ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स

by Bhupendra Sahu

कमलेश साहू
रायपुर छत्तीसगढ़ में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने देशभर के जनजातीय समुदायों के खिलाड़ियों को एक मंच पर एकत्रित किया, जहाँ कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कुछ के लिए यह इतनी बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का पहला अनुभव था, तो कुछ के लिए यह उनके उभरते करियर का अगला बड़ा कदम साबित हुआ।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले संस्करण में 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने भाग लिया, जिसमें 2000 खिलाड़ियों के बीच रोमांचक प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर थे। मल्लखंभ और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों को इसमें प्रदर्शन खेलों के रूप में शामिल किया गया था। सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण छत्तीसगढ़ के तीन शहरों – रायपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर को इन खेलों की मेजबानी सौंपी गई थी।

ऐसे मौके पर जब भारत वर्ष 2030 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है और 2036 ओलंपिक की संभावित मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने विविध जनजातीय पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने और कई खेलों में भारत की बेंच स्ट्रेंथ को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभाव छोड़ने वाले खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से चमक बिखेरी। वहीं कई खिलाड़ियों ने भविष्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन की संभावना दिखाई। तैराकी में कनार्टक के 21 साल के तैराक मणिकांता एल. और ओडिशा की 15 वर्षीया अंजलि मुंडा, तीरंदाजी में विश्व यूथ चैंपियन बनने वाली झारखंड की कोमालिका बारी एवं गुजरात की 21 वर्षीया भार्गवी भगोरा ने अपने कामयाब प्रदर्शन से देशभर के लोगों का ध्यान खींचा।

वेटलिफ्टिंग में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले झारखंड के 19 साल के बाबूलाल हेम्ब्रम और ओडिशा की झिल्ली दलाबेहरा तथा झारखंड के धावक शिव कुमार सोरेन ने भी खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के दौरान अपनी प्रतिभा और क्षमता का लोहा मनवाया। छत्तीसगढ़ की 24 साल की उभरती अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर किरण पिस्दा और 4 रजत पदक जीतने वाली तैराक अनुष्का भगत पूरे आयोजन के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहीं। छत्तीसगढ़वासियों के लिए इन दोनों ने न केवल भविष्य के लिए अच्छी उम्मीदें जगाईं, बल्कि अपने खुद के सपनों को भी दिए नए पंख दिए।

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