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राज्य सरकार धर्म-संस्कृति की धारा को प्रवहमान बनाए रखने के लिए सतत् सक्रिय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

by Bhupendra Sahu

भोपाल :  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मनुष्य जीवन में जिस तरह शरीर को भोजन आवश्यक है, उसी प्रकार आत्मा की शुद्धि के लिए भक्ति और सत्संग बहुत जरूरी है। राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में धर्म-संस्कृति की धारा को निरंतर प्रवाहमान बनाए रखने के लिए सतत् सक्रिय है। हमारे किसान अपने कठोर परिश्रम से देशवासियों को अन्न और सभी आवश्यक भोजन सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। राज्य सरकार हर कदम पर किसानों के साथ है। किसानों को उनके परिश्रम का उचित सम्मान देने के लिए राज्य सरकार ने गेहूं का उपार्जन शुरू किया है। प्रत्येक गेहूं उपार्जन केंद्र पर किसानों के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। प्रदेश के किसानों ने गेहूं की फसल लगाई और धरती माता की कृपा से इस वर्ष गेहूं का उत्पादन दोगुना हो गया है। समर्थन मूल्य पर गेंहू खरीदने के साथ-साथ किसानों को 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस का भी लाभ दिया जा रहा है। अपनी प्रतिबद्धता के बलबूते राज्य सरकार इस वर्ष 2 हजार 625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीद रही है। किसानों से उनकी उपज का एक-एक दाना खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को शुजालपुर स्थित हाटकेश्वर धाम सेमली घाट में संत श्री पंडित कमल किशोर नागर जी द्वारा प्रस्तुत श्रीमद्भगवत् कथा में सम्मिलित होकर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इससे पहले शाजापुर जिले के शुजालपुर में गेंहू उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण भी किया।

संतानों को संस्कारित बनाना जरूरी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत समाज ने सदैव देवताओं के समान हमारे समाज का मार्गदर्शन किया है। महाराज श्री कमल किशोर नागर ने अध्यात्म और धर्म के माध्यम से पूरी पीढ़ी को जीवन जीना सिखाया है। गुरूदेव गौशाला के लक्ष्य के साथ सिर्फ रचनात्मक कार्यों में ही आस्था रखते हैं। उन्होंने सनातन संस्कृति की धारा प्रवाहित करते हुए समाज के बीच से अशिक्षा और नशे जैसी बुराईयों को खत्म करने का संकल्प लिया है। उनके गौसेवा और समाज सुधार कार्यों का व्यापक प्रभाव है। हमारी संतानें वंश और गौत्र की अमरता की निशानी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर संतान संस्कारित हैं तो उनके रूप में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का आशीर्वाद मिल जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अगली पीढ़ी को संस्कार, शिक्षा देने के लिए उपस्थित जनसमुदाय को प्रेरित किया।

भारतीय संस्कृति त्याग और दान की संस्कृति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के प्रसंग से संदेश मिलता है कि जीवन में धन, सुख, संपदा कितनी भी मिल जाए, लेकिन मन का प्रेम इन सबसे ऊपर और महत्वपूर्ण है। परमात्मा ने हमें समाज के लिए कुछ अच्छा करने का अवसर दिया है। हमारी संस्कृति त्याग और दान की संस्कृति है, हमें मूल्यों को अपनाने का हरसंभव प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उज्जैन के पास जानापाव और सांदीपनि आश्रम सहित भगवान श्रीकृष्ण के प्रत्येक लीला स्थल को पवित्र तीर्थ के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में गीता भवन और जनपदों में एक-एक आदर्श वृंदावन ग्राम बनाए जा रहे हैं।

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