रायपुर मरवाही वनमण्डल के अंतर्गत आने वाले वन क्षेत्रों में नैसर्गिक रूप से सीताफल की उपज भारी मात्रा में प्रतिवर्ष प्राप्त होती है। एक सर्वेक्षण के अनुसार उक्त वन मण्डल में लगभग 1500 टन सीताफल का उत्पादन होता है।
इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में विगत दो वर्षों से वन विभाग द्वारा प्रभावी पहल की गई है। इसके तहत सीताफल को संग्राहकों से विभाग एवं वन प्रबंधन समितियों द्वारा अधिकतम दर 12 से 15 रूपए प्रति कि.ग्रा. की दर से क्रय किया जा रहा है। साथ ही सीताफल के मूल्य संवर्धन हेतु यहां सीताफल के प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना की गई है। जहां पर पके हुए सीताफल के पल्प को निकालकर उसे हार्डनर मशीन द्वारा माईनस 52 डिग्री सेल्सियस तक लेजाकर हार्ड करने के पश्चात् डीप फ्रीजर एवं शीत गृह में माईनस 25 डिग्री सेल्सियस में स्टोर किया जाता है। जिसे क्रेताओं की मांग पर आपूर्ति एवं सीताफल आईसक्रीम बनाने में की जाती है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव ने बताया कि इस योजना में जहां संग्राहको को सीताफल का उचित मूल्य मिल रहा है, वहीं सीताफल से पल्प निकालने में 2 माह तक 50 महिलाओं तथा नवयुवकों को सतत् रोजगार प्राप्त हो रहा है। इसी तरह वन मंडलाधिकारी मरवाही श्री शशि कुमार ने बताया कि पहले इसे ग्रामीणों द्वारा तोड़कर बिचौलियों को सस्ते कीमत पर लगभग 5 से 7 रूपए प्रति किलोग्राम में बेच दिया जाता था। जिसे बिचौलिये ग्रेडिंग करके निकटस्थ शहरी बाजारों में अच्छा लाभ लेकर बेच देते थे। खुदरे व्यापारी इसको 60 से 80 रूपए प्रति कि.ग्रा. तक विकय करते थे। इस प्रकार मरवाही क्षेत्र के गांवों से 6-7 रूपए प्रति कि.ग्रा. निकलने वाला सीताफल लगभग दस गुनी दर पर उपभोक्ता तक पहुंचती है किंतु इसका लाभ ग्रामीणों को प्राप्त नहीं होता था।