मुंबई फंडिंग दबाव के कारण बैंकों के कर्ज की वृद्धि दर घट सकती है। अगले वित्त वर्ष में यह 16 फीसदी से दो फीसदी कम होकर 14 फीसदी रह सकती है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स का अनुमान है कि कर्ज मांग मजबूत है। बुरे फंसे कर्जों में सुधार हो रहा है। बावजूद इसके कर्ज की वृद्धि दर घटेगी, क्योंकि जमा की वृद्धि दर लगातार घट रही है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा, यदि कर्ज और जमा वृद्धि दर स्थिर रहती है, तो जमा प्रतिस्पर्धा का दौर शुरू हो जाएगा। इससे बैंक मार्जिन में और कमी आएगी। निजी क्षेत्र के बैंकों को इस स्थिति का ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि वे सरकारी बैंकों की तुलना में बहुत ज्यादा कर्ज-जमा अनुपात पर काम कर रहे हैं। सरकारी बैंकों की जमा की स्थिति ज्यादा बेहतर है। एसएंडपी का कहना है कि बैंकों का शुद्ध ब्याज मार्जिन इस वित्त वर्ष के तीन फीसदी से घटकर अगले वित्त वर्ष में 2.9 फीसदी पर आ सकता है।