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एक लोटा जल चढ़ाओ सब दु:ख गल जाएंगे -पंडित प्रदीप मिश्रा

by Bhupendra Sahu

सीहोर । जब मिट्टी का दीया रातभर अंधेरे से लड़ सकता है तो भगवान का दिया इंसान जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं से क्यों नहीं लड़ सकता। भय में जीने की आदत को छोड़ो। एक लोटा जल चढ़ाओ सब दु:ख गल जाएंगे। एक लोटा जल हर समस्या का हल है। उक्त विचार जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में जारी सात दिवसीय श्री महाशिवरात्रि शिव महापुराण के दूसरे दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि यह शिव की कृपा है, जब तक उनकी करुणा नहीं मिलती हम सत्य के मार्ग पर नहीं चल सकते है। शिव महापुराण कहती है कि हमारे मन में विकार, तृष्णा रहेगी तब तक हमारा कल्याण नहीं होगा। जैसे मोबाइल अगर खराब हो जाए तो उसे दुकान पर ले जाकर सुधार करवाते है, वैसे ही अगर मन खराब हो जाए तो उसे महादेव की भक्ति और शिवालय में ले जाकर ठीक करा सकते है।

भागवत भूषण पंडित मिश्रा ने कहा कि संत नामदेव जी भोजन कर रहे थे। तभी एक कुत्ता आया और उनकी थाली से रोटी लेकर भाग गया। संत नामदेव जी उस कुत्ते के पीछे-पीछे घी का कटोरा लेकर भाग पड़े। भागते-भागते वह कह रहे थे, भगवान, रुखी रोटी कैसे खाओगे, साथ में घी भी ले लो। संत नामदेव के चरम भावावास्था को इस छोटे से दृष्टांत से समझा जा सकता है। भक्ति की चरम अवस्था ही भगवान की प्राप्ति में सहायक होती है। उन्होंने कहा कि परोपकार यानी पर और उपकार। पर यानी दूसरा और उपकार यानी भला करना। दूसरों का भला करने को ही परोपकार कहलाता है। हमारा यह जीवन तभी सार्थक है, जब हम परमार्थ के लिए जीते हैं। परोपकार की तरंगें हमारी सांसों को तरंगित करतीं हैं। अगर ये तरंगित नहीं करतीं, तब मनुष्य और पशु में कोई अंतर नहीं रह जाता। कहते हैं कि धर्म की बुनियाद किसी देवी-देवता की अनुकंपा पर नहीं टिकी है, बल्कि उन व्यावहारिक गुणों पर आधारित है, जो मनुष्य की समस्त चेतना को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करती है। हमारे व्यवहार में दया, परोपकार, सहिष्णुता और सहयोग की भावना हो और उनके अनुरूप काम करते हों तो सबसे बड़ा धर्म यही है। ऐसा माना जाता है कि किसी एक सतवृत्ति को अगर अपना लिया जाए, तो बाकी गुण अपने आप आ जाते हैं। जैसे अगर कोई सहयोग की भावना रखता है तब दया और परोपकार का अंश स्वत ही आ जाएगा। हमारे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि उस सत्कर्म से है जिससे एक बड़े समुदाय का लाभ होता है। भारतीय संस्कृति में मानव-मात्र के कल्याण की भावना को श्रेष्ठ स्थान दिया गया है, जो परहित से जुड़ा हुआ है। परोपकार के समान न कोई दूसरा धर्म है और न कोई पुण्य। प्रकृति का कण-कण परोपकार में लिप्त है।

कुबेरेश्वरधाम में जारी सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव शिव महापुराण का क्रम जारी है, इस भव्य कार्यक्रम में गुरुवार को लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होने आए थे, जिसके कारण जाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई थी, लेकिन क्षेत्रवासी, विठलेश सेवा समिति, प्रशासन और सभी सामाजिक संगठनों के कारण अब स्थिति सामान्य हो गई है और पूरे आनंद के साथ श्रद्धालुओं के द्वारा पूरे भाव के साथ कथा का श्रवण कर रहे है। क्षेत्र महाशिवरात्रि के पर्व के पहले ही भक्ति मय हो गया है। शहर के अन्य स्थानों पर समाजसेवियों के द्वारा यहां पर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को भोजन, पानी और ठहराने आदि की व्यवस्था की जा रही है। विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने बताया कि शिव महापुराण के तीसरे दिन महा शिवरात्रि के पावन अवसर पर यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को फलहारी प्रसादी का वितरण किया जाएगा और इसके अलावा भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की झांकी के अलावा भागवत भूषण पंडित मिश्रा के द्वारा भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के बारे में विस्तार से वर्णन किया जाएगा।

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