Home » चर्मरोग निदान शिविर उरला व कंडरापारा में मिले कुष्ठ के 3 नए मरीज

दुर्ग /  जिले के शहरी क्षेत्र दुर्ग नगर निगम में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्नमूलन कार्यक्रम के तहत घनी बस्तियों में चर्म रोग निदान शिविर 5 से 13 फरवरी तक प्रत्येक वार्ड में आयोजित किये जा रहे है। जिसमें कुष्ठ रोग की पहचान एवं इलाज के लिए परामर्श दिया जा रहा है। आज दूसरे दिन उरला संगम चौक व कंडरापारा में शिविर आयोजित कर 113 लोगों की जांच की गय। वहीं कंडरापारा मुहल्ले में 53 लोगों की जांच की गयी जिसमें 3 कुष्ठ के पीबी के मरीजों की पहचान की गई। नए पीबी मरीजों में एक 6 वर्ष की बच्ची और दो महिलाएं कुष्ठ रोग से प्रभावित मिली। महिला के हाथ के कोहिनी में दाग मिले और बच्ची के माथे में कुष्ठ से संबंधित धब्बे की पहचान कर एमडीटी की दवाई का सेवन कराया गया। शिविर में आई लगभग 40 महिलाओं में दाद, खाज, खुजली सहित अन्य चर्मरोगों की शिकायत मिली। जिला कुष्ठ अधिकारी के मार्गदर्शन में इन सभी महिलाओं को जिला अस्पताल की चर्मरोग चिकित्सक डॉ. मोनिका जैन द्वारा इलाज कर दवाई वितरण किया गया।

इसी तरह उरला के संगम चौक की श्रमिक बस्ती में भी चर्म रोग निदान शिविर लगाया गया। शिविर में 60 से अधिक लोगों ने चर्मरोग का इलाज कराया जिसमें एक मरीज में कुष्ठ रोग के संदेहस्पाद होने पर सप्ताहभर कीदवाई दी गयी इसके अलावा उरला में दो दर्जन महिलाओं में खुजली, दाद, बेमची सहित अन्य चर्मरोग से संबंधित शिकायतों का निदान भी किया गया। शिविर के आयोजन के बारे में लोगों को संदेश देनेव जागरुक करने के लिए कुष्ठ जागरुकता रथ भी चलाया जा रहा है।

जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने शिविर में लोगों को बताया, “शरीर में किसी प्रकार के दाग, धब्बे, खुजली व सुन्न पन का अहसास होने पर तुरंत नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र जाकर निशुल्क जांच व इलाज कराएं। कुष्ठ के प्रभावित मरीज को दवा की एक खुराक लेने पर ही बीमारी के संक्रमण के प्रभाव को खत्म कर देता है। वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा डब्लूएचओ की गाइडलाइन के अनुसार मरीजों को 6 माह और 12 माह की दवाई देकर मरीज व परिवार के सदस्यों को कुष्ठ के प्रसार को रोका जा सकता है। इसके लिए हमें जागरुक होने के साथ बीमारी को लेकर तुरंत इलाज कराने की पहल करने की जरुरत है।

डॉ. शुक्ला ने बताया, “अज्ञानता वश समाज में कुष्ठ को पुराने जन्म का पाप व छुआछूत की बीमारी माना जाता था जिससे लोगइस बीमारी को छिपाना शुरू कर दिए। गांधी जी ने इस रोग को लेकर जागरूक कर बीमारी को देश में विकराल रूप लेने से रोका। लोगों को कुष्ठ रोग के लक्षण वाले व्यक्तियों को इलाज के लिए प्रेरित करने और सामाजिक भेदभाव की धारणा को मिटाने की जरुरत है”।

शहर के वार्डों में बोरसी भाठा शीतला चौक सामुदायिक भवन व कुंदरापारा आंगनबाड़ी भवन के पास 8 फरवरी को निशुल्क चर्म रोग निदान शिविर लगाया जाएगा ।वहीँ 9 फरवरी कोकरहीडीह व शक्ति नगर, 10 फरवरी को सिकोला बस्ती व तितुरडीह, 11 फरवरी को रायपुर नाका व डिपरापारा, 12 फरवरी को राजीव नगर व उत्कल नगर, 13 फरवरी को चांदमारी आजादपारा व उरला के बाम्बे आवास में शिविर का आयोजन किया जाएगा।

डॉ. शुक्ला ने बताया नए व पुराने मरीजों के आसपास के 10-10 घरों में हेल्दी कान्टेक्ट के जरिये इनके संपर्क में आने वाले परिवार व पड़ोसियों की कुष्ठ रोग की जांच की जाएगी। जिले में इस वर्ष नवंबर से जनवरी माह तक पाटन ब्लॉक के सभी ग्राम पंचायतों में जनभागीदारी से कुष्ठ खोज अभियान चलाया गया जिसमें 52 नए कुष्ठ मरीज की पहचान की गई है।

उन्होंने बताया , दुर्ग जिले में गतवर्ष 2020-21 में नए कुष्ठ रोगियों की सघन खोज अभियान चलाया गया था जिसमें लक्ष्य 791 के विरुद्व मार्च माह में 849 नए मरीजों की पहचान कर इलाज किया गया था। इसके अलावा स्कूलों में कुष्ठ जागरुकता प्रतियोगिता आयोजित कर 82 बच्चों को चिंहाकित कर 38 स्कूली बच्चों एमडीटी की दवाई खिलाया गया था। शिविर में नॉन मेडिकल असिस्टेंट सीएल मैत्री, रिटायर्ड नॉन मेडिकल सुपरवाइजर एसडी बंजारे, पीआर बंजारे, केके गंजीर, काउंसलर गणेश निर्मलकर, एलटी ओमप्रकाश साहू, विमल वर्मा, मितानिनों में सुल्ताना बेगम, धनेश्वरी यादव, निशा बघेल, किरण साहू, अमरिका साहू, संगीता सोनवानीव ललिता साहू सहित अन्य का सहयोग रहा।

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