Home » संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक : बीजापुर की मनीषा नायक ने पेश की मिसाल

संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक : बीजापुर की मनीषा नायक ने पेश की मिसाल

by Bhupendra Sahu

रायपुर यदि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी अनुकूल बनाया जा सकता है। बेरोजगारी और सीमित संसाधनों जैसी चुनौतियों के आगे घुटने टेकने के बजाय, उन्होंने नवाचार का रास्ता चुनकर अपनक भ्सवष्य को संवार सकते हैं। आज छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले की रहने वाली 22 वर्षीय मनीषा नायक ने यह साबित कर दिया है। वे एक सफल राइस मिल संचालक के रूप में न केवल आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं, बल्कि अन्य ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बन चुकी हैं।

’संघर्ष और दुविधा का वो शुरुआती दौर’
मनीषा नायक का जीवन सफर शुरुआत में काफी संघर्षमय रहा। पढ़ाई पूरी करने के बाद एक अदद स्थायी रोजगार के लिए उन्होंने लंबे समय तक प्रयास किए, लेकिन सफलता हाथ नहीं लग रही थी। समय बीतने के साथ भविष्य की चिंता और मानसिक तनाव गहराता गया। एक साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आने के कारण उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने और परिवार का संबल बनने की थी। ऐसे नाजुक मोड़ पर मनीषा ने हताश होने के बजाय स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने का साहसिक निर्णय लिया।

’उम्मीद की एक नई किरण’
इसी बीच एक परिचित के माध्यम से मनीषा को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, बीजापुर के बारे में पता चला। वहाँ पहुँचने पर विभागीय अधिकारियों ने उन्हें अत्यंत सरल और प्रभावी ढंग से केंद्र सरकार की पीएमएफएमई (PMFME) योजना की बारीकियों से अवगत कराया।
’पीएमएफएमई योजना- आत्मनिर्भरता का नया आधार’
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना विशेष रूप से उन महत्वाकांक्षी युवाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अपना छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। विभाग से मिले मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने मनीषा के भीतर एक नया आत्मविश्वास भर दिया। उन्हें यह विश्वास हो गया कि वे भी अपने दम पर एक सफल उद्यमी बन सकती हैं।

Share with your Friends

Related Articles

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More