Home » हौसले की उड़ान : 75 प्रतिशत श्रवण बाधित पूजा साहू ने झुग्गी से निकलकर नेट परीक्षा में रचा इतिहास

हौसले की उड़ान : 75 प्रतिशत श्रवण बाधित पूजा साहू ने झुग्गी से निकलकर नेट परीक्षा में रचा इतिहास

by Bhupendra Sahu

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील नीतियां और त्वरित प्रशासनिक पहल अब जरूरतमंदों के जीवन में नई उम्मीद बनकर सामने आ रही हैं। इसका एक अनुपम और प्रेरणादायी उदाहरण जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही की 75 प्रतिशत श्रवण बाधित दिव्यांग युवती कुमारी पूजा साहू ने पेश किया है। पूजा ने अत्यंत कठिन आर्थिक परिस्थितियों और व्यक्तिगत संघर्षों को बौना साबित करते हुए समाजशास्त्र विषय में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

झुग्गी-झोपड़ी के अभावों में तपी प्रतिभा

पेण्ड्रारोड के वार्ड क्रमांक 1 (सिंचाई कॉलोनी, सारबहर) स्थित स्मृति वाटिका के पास एक छोटी सी झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली पूजा साहू ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास अडिग हो, तो शारीरिक और आर्थिक अक्षमताएं भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा के प्रति अपनी ललक को कम नहीं होने दिया और विपरीत हालातों में भी निरंतर अध्ययन जारी रखा।

समाज कल्याण विभाग की त्वरित संवेदनशीलता

कुमारी पूजा साहू अपने आगे पीएच.डी. शोध कार्य हेतु आर्थिक सहायता की गुहार लेकर जिला समाज कल्याण विभाग के कार्यालय पहुंची थीं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को बताया कि उन्होंने समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर करने के बाद राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली है। उनकी असाधारण योग्यता को देखते हुए विभाग ने बिना किसी विलंब के तत्काल कार्यवाही शुरू की।

घर की स्थिति देख तत्काल रोजगार की व्यवस्था

समाज कल्याण विभाग के प्रभारी सहायक संचालक श्री सुरेश भारती ने वस्तुस्थिति का आकलन करने के लिए स्वयं पूजा साहू के निवास का जमीनी निरीक्षण किया। निरीक्षण में पता चला कि लगभग 9 वर्ष पूर्व पूजा के पिता का साया उनके सिर से उठ चुका है। उनकी वृद्ध माता जी स्थानीय स्तर पर मजदूरी करके किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं।

पूजा के इस कड़े संघर्ष और असाधारण प्रतिभा को देखते हुए विभाग ने एक बेहद सकारात्मक पहल की। उन्हें तत्काल एक अशासकीय समाजसेवी संस्था ष्प्रगति सेवा संस्था में सामाजिक कार्यकर्ता के पद पर नियुक्ति दिलाई गई है। इस कार्य के लिए उन्हें 10 हाजर रूपए प्रति माह का मानदेय प्राप्त होगा, जिससे उनके परिवार को तुरंत आर्थिक संबल मिलेगा। इसके साथ ही, उनके पीएच.डी. शोध कार्य के लिए विशेष सहायता राशि स्वीकृत कराने के संबंध में उच्च कार्यालय को आवश्यक प्रस्ताव और पत्राचार की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

Share with your Friends

Related Articles

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More