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वन है तो जीवन है : वन विभाग की योजनाओं से हजारों परिवारों को मिल रहा सहारा

by Bhupendra Sahu

रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग वन आश्रित परिवारों और तेन्दूपत्ता संग्राहकों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रहा है। “वन है तो जीवन है, तेन्दूपत्ता है तो रोजगार है” के संदेश के साथ वन विभाग और लघु वनोपज संघ ग्रामीण एवं वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को रोजगार, बीमा सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। वनमण्डलाधिकारी एवं प्रबंध संचालक, कोरिया वनमण्डल बैकुण्ठपुर श्रीमती प्रभाकर खलको ने कहा कि विभाग का उद्देश्य वन आश्रित परिवारों को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना भी है। वन विभाग की योजनाएं आज हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

तेन्दूपत्ता संग्रहण बना आय का प्रमुख साधन
शासन द्वारा वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर 5.50 रूपए प्रति गड्डी तय की गई है। इसके अनुसार 100 गड्डियों पर 550 रूपए और प्रति मानक बोरा 5550 रूपए का भुगतान किया जाएगा। इससे वन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों को रोजगार और आर्थिक सहारा मिल रहा है।

लघु वनोपजों के समर्थन मूल्य से आर्थिक मजबूती
न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत सालबीज, महुआ, इमली, कोदो, माहुल पत्ता सहित विभिन्न लघु वनोपजों की निर्धारित दरों पर खरीदी की जा रही है। इससे वन आश्रित परिवारों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है और बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है।

बीमा योजनाओं से मिल रही सामाजिक सुरक्षा
राजमोहनी देवी बीमा योजना के अंतर्गत तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों को बीमा सुरक्षा दी जा रही है। सामान्य मृत्यु, दुर्घटना जनित मृत्यु और विकलांगता की स्थिति में सहायता राशि प्रदान की जाती है। इससे जरूरत के समय परिवारों को आर्थिक सहारा मिलता है।
इसके अलावा समूह बीमा योजना के तहत परिवार के अन्य सदस्यों को भी सहायता राशि का लाभ दिया जा रहा है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत का माध्यम बन रही है।

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