Home » रासायनिक खरपतवारनाशकों का नियंत्रित और प्रभावी उपयोग किया जाए: डॉ. नायक

रासायनिक खरपतवारनाशकों का नियंत्रित और प्रभावी उपयोग किया जाए: डॉ. नायक

by Bhupendra Sahu

रायपुर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आज यहां अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान परियोजना” की 33वीं वार्षिक समीक्षा बैठक की शुरूआत हुई। इस तीन दिवसीय बैठक का उद्घाटन मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उप महानिदेशक (NRM) डॉ. ए. के. नायक द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, (आईसीएआर) बरोंडा रायपुर के निदेशक डॉ. पी. के. राय तथा डॉ. राकेश कुमार सहायक महानिदेशक आईसीएआर नई दिल्ली मौजूद थे। यह परियोजना देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में फसलों में खरपतवार नियंत्रण पर अनुसंधान तथा नवीनतम तकनीकांे के विकास एवं उनके किसानों के बीच प्रसार हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा जबलपुर स्थित खरपतवार अनुसंधान निदेशालय के माध्यम से चलाई जा रही है।

रासायनिक खरपतवारनाशकों का नियंत्रित और प्रभावी उपयोग किया जाए: डॉ. नायक

बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. ए. के. नायक ने वैज्ञानिकों से खरपतवारों के रसायनिक नियंत्रण के बजाय समन्वित खरपतवार नियंत्रण को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खरपतवारनाशकों के हानिकाकरक प्रभावी को देखते हुए उन पर आधारित अनुसंधान को हतोत्साहित किया जाए। डॉ. नायक ने प्राकृतिक एवं जैविक कृषि अपनाने पर जोर देते हुए विभिन्न लाभकारी सूक्ष्मजीवों, केंचुओं तथा कीट पतंगो पर खरपतवारनाशकों के दुष्प्रभाव का अध्ययन करने की सलाह दी। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि रासायनिक खरपतवारनाशी यद्यपि खेतों में खरपतवारों के नियंत्रण करने में समर्थ है लेकिन ये पर्यावरण तथा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए हानिकारक है अतः इनका नियंत्रित और प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। खरपतवार नाशकों का अंधाधुंध उपयोग मानवों और जीव-जंतुओं के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि खरपतवारों के प्रबंधन के लिए केवल रसायनों पर निर्भर न रहकर यांत्रिक एवं बायोलॉजिकल नियंत्रण विधियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। समारोह को डॉ. पी. के. राय तथा डॉ. राकेश कुमार ने भी संबोधित किया।

खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर के प्रभारी डॉ. विजय कुमार चौधरी, प्रमुख वैज्ञानिक ने अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान परियोजना के तहत देशभर के सभी 17 केन्द्रों में संचालित गतिविधियों एवं उपलब्धियों की जानकारी प्रस्तुत की। इस अवसर पर परियोजना के वार्षिक प्रतिवेदन 2025-26 के साथ ही अन्य प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. एस.एस. कोल्हे को खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान हेतु लाइफटाइम अचिवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना को खरपतवार प्रबंधन हेतु आईसीएआर बेस्ट संेटर अवार्ड से सम्मानित किया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान एवं बैठक के आयोजन सचिव डॉ. वी.के. त्रिपाठी ने रायपुर केन्द्र में इस परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यो एवं गतिविधियों की जानकारी दी। परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ. श्रीकांत चितले ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Share with your Friends

Related Articles

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More