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जिंदल ग्रुप 2025 तक विकसित करेगा 4,500 टन प्रति वर्ष की ग्रीन हाइड्रोजन क्षमता

by Bhupendra Sahu

नई दिल्ली। जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड और जिंदल रिन्यूएबल्स की ओर से सोमवार को ग्रीन हाइड्रोजन में निवेश के लिए साझेदारी का ऐलान किया गया।
देश की स्टील इंडस्ट्री में दोनों कंपनियों की ओर से डी-कार्बोनाइजेशन और ग्रीन एनर्जी में लीडरशीप के लिए यह एमओयू साइन किया है। जिंदल स्टील की योजना ग्रीन हाइड्रोजन को ओडिशा के अंगुल में स्थित उसके डायरेक्ट रेड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) यूनिट्स में एकीकृत करना है।
कंपनी की ओर से कहा गया कि पहले चरण में जिंदल रिन्यूएबल्स की ओर से 4,500 टन प्रति वर्ष की ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी। इसे शुरू करने की डेडलाइन दिसंबर 2025 निर्धारित की गई है। इस प्रोजेक्ट में प्रति वर्ष 36,000 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति भी शामिल होगी जिसका उपयोग अंगुल स्टील वर्क्स में किया जाएगा।
जिंदल रिन्यूएबल्स की ओर से जिंदल स्टील यूनिट्स को 3 गीगावाट की रिन्यूएबल एनर्जी की भी आपूर्ति की जाएगी। इसके जरिए जिंदल स्टील की कोशिश अगले 2 से 3 वर्षों में कोयले पर निर्भरता को 50 प्रतिशत तक घटाना है।
जिंदल स्टील के स्ट्रेटजी और कॉरपोरेट मामलों के निदेशक संजय सिंह का कहा, उत्पादन के प्रोसेस में ग्रीन एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन का एकीकरण करके, हम न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम कर रहे हैं, बल्कि भारत की स्टील इंडस्ट्री के लिए नए बेंचमार्क सेट कर रहे हैं। यह साझेदारी सतत विकास और नवाचार के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
इस करार के तहत जिंदल स्टील की ओर से जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर और सपोर्ट उपलब्ध कराया जाएगा। जिंदल रिन्यूएबल्स की ओर से ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी सुविधाओं के विकास और ऑपरेशन को संभाला जाएगा।
इस साझेदारी के जरिए ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की लागत में ही नहीं कमी आएगी, बल्कि इससे अगले 25 वर्षों के लिए लंबी अवधि के सतत बिजनेस मॉडल का रास्ता सुनिश्चित करना है।
जिंदल स्टील, पूरे विश्व में 12 अरब डॉलर के निवेश के साथ लगातार अपनी क्षमता और संचालन को किफायती बनाने को लेकर काम करता रहता है। साथ ही भारत को आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान दे रहा है।
जिंदल रिन्यूएबल का उद्देश्य भारत में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में अग्रणी बनना है। मौजूदा समय में करीब 3 गीगावट की रिन्यूएबल क्षमता विकसित कर रहा है। कंपनी का उद्देश्य 2030 तक 12 गीगावाट से ज्यादा की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करना है।
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