नई दिल्ली । चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अदालती मामलों को महीनों आरक्षित रखने के जजों के रवैये पर नाराजगी जताई है। सीजेआई ने आज एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जज बिना फैसला सुनाए किसी केस को 10 महीनों से ज्यादा समय तक रिजर्व रखते हैं। यह चिंता का विषय है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने दो टूक कहा कि ईमानदारी से कहूं तो इतने समय के बाद मौखिक दलीलें मायने नहीं रखती हैं। कोर्ट की सुनवाई और फैसलों पर रिपोर्ट करने वाली ‘बार एंड बेंचÓ के अनुसार, सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, चिंता का विषय यह है कि जज बिना फैसलों के 10 महीने से अधिक समय तक मामलों को रिजर्व रखते हैं। मैंने सभी हाई कोर्ट को लिखा है। लेटर के बाद मैंने देखा है कि कई जज केवल मामलों को रिजर्व कर रहे हैं और सूचीबद्ध कर रहे हैं। इसके अलावा, आंशिक सुनवाई भी कर रहे हैं। ईमानदारी से कहूं तो इतने लंबे समय के बाद मौखिक दलीलें मायने नहीं रखतीं और जज भूल जाते हैं।
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