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सनातन धर्म शाश्वत कर्तव्यों का समूह, मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी-बोलने की आजादी का मतलब नफरत फैलाना नहीं

by Bhupendra Sahu

चेन्नई । मद्रास हाईकोर्ट ने आज अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि सनातन धर्म शाश्वत कर्तव्यों का एक समूह है, जिसमें राष्ट्र, राजा, अपने माता-पिता और गुरुओं के प्रति कर्तव्य और गरीबों की देखभाल करना शामिल है। कोर्ट ने कहा कि सनातन में हर तरह की जिम्मेदारियां शामिल हैं चाहे वो राष्ट्र के लिए हो, राजा का अपनी प्रजा के लिए हो या फिर माता-पिता और गुरुओं के लिए हो और इसके अलावा भी कई अन्य कर्तव्य शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि बोलने की आजादी मौलिक अधिकार है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि नफरत फैलाई जाए। खासकर जब मामला धर्म से जुड़ा हो। यह तय किया जाना चाहिए कि किसी के कुछ बोलने से दूसरे को नुकसान नहीं होना चाहिए। न्यायमूर्ति शेषशायी ने कहा कि समान नागरिकों वाले देश में अस्पृश्यता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। भले ही इसे ‘सनातन धर्मÓ के सिद्धांतों के भीतर कहीं अनुमति के रूप में देखा जाता है, फिर भी इसे रहने के लिए जगह नहीं मिल सकती है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 17 में कहा गया है घोषणा की कि अस्पृश्यता समाप्त कर दी गई है।

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