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नयी दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारत के वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 8.2 प्रतिशत कर दिया है, इससे पहले इस बहुपक्षीय वित्तीय संस्था ने इसके 09 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। आईएमएफ ने ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का भारत में निजी उपभोग और निवेश की मांग पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी में किए गए पिछले अनुमानों के बाद से वैश्विक आर्थिक संभावनाएं खराब हुयी हैं।

रिपोर्ट में जापान की आर्थिक वृद्धि दर के ताजा अनुमान में जनवरी के अनुमानों की तुलना में 0.9 प्रतिशत और भारत की 0.8 प्रतिशत की कटौती की गई है। यह एशिया के इन दोनों प्रमुख देशों में घरेलू मांग में कमजोरी को दर्शाता है। आईएमएफ का कहना है कि तेल की कीमतें ऊंची होने से निजी उपभोग और निवेश प्रभावित हो सकता है और शुद्ध निर्यात में भी कमी हो सकती है। आईएमएफ ने छह माह के अंदर दूसरी बार वैश्विक आर्थिक दर के अनुमान को घटाया है। उसके ताजा अनुमान के अनुसार 2022 में विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि 3.6 प्रतिशत रहेगी।

आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा ने कहा, यूक्रेन की लड़ाई एक भयावह मानव त्रासदी से बढ़कर है। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा दबाव है और यह आर्थिक दशा में सुधार की प्रक्रिया के लिए गंभीर क्षति है। आईएमएफ ने कहा है कि उभरती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं वाले ज्यादातर देश इस लड़ाई तथा कोविड-19 महामारी के दुष्परिणामों का सामना कर रहे हैं।
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