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हंगामे और गतिरोध के बीच संसद का शीत सत्र खत्म

by Bhupendra Sahu

नई दिल्ली । संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दो दिन बचे थे, लेकिन हंगामे और गतिरोध के चलते आज संसद शुरू होते ही दोनों सदनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। राज्यसभा के सभापति वैंकेया नायडु ने सदन न चल पाने को लेकर नाराजगी जताई और सांसदों से कहा कि सदन अपनी क्षमता के मुकाबले बहुत कम चली। मैं आप सबसे आग्रह करता हूं कि आप आत्मावलोक करें कि इस सदन में काम कितना बेहतर हो सकता था। मेरा इस पर बहुत आलोचनात्मक नजरिया है।

उधर, तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन कल निलंबित कर दिए गए थे, जिसके बाद आज वो संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के पास 12 निलंबित सांसदों के धरने में शामिल हुए। डेरेक पर सदन की रूल बुक फाडऩे का आरोप लगा है। हालांकि, उन्होंने इससे इनकार किया है।
बता दें कि सरकार ने कल लोकसभा में स्मृति ईरानी ने लड़कियों की शादी की उम्र को 18 से बढ़ाकर 21 करने का प्रस्ताव पेश किया था। वहीं, निर्वाचन विधि संशोधन विधेयक को लोकसभा की मंजूरी मिल गई थी, जिसके बाद विपक्ष के विरोध के बीच इसे कल राज्यसभा में पेश किया गया था। शीकालीन सत्र के आखिरी सप्ताह में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसदीय दल की बैठक भी हुई थी।
संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार कई विधेयकों को पारित कराने में सफल साबित हुई। सत्र की शुरुआत में ही कृषि कानूनों को वापस लेने वाले बिल पर मुहर लगाई गई। वहीं, मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोडऩे संबंधी चुनाव सुधार बिल, जजों के वेतन-भत्ते व सेवा शर्तें, एनडीपीएस बिल, सीबीआई-प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुखों का कार्यकाल पांच साल तक बढ़ाने और जननीय प्रजनन उपचार उद्योग विनियमन बिल को संसद से मंजूरी मिली।
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