Home » *मुख्यमंत्री ने रोका-छेका के अवसर पर की घोषणा – सोलर लाइट से रोशन होंगी रिसामा की गलियां*

          दुर्ग 01 जुलाई 2021/मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रोका-छेका के शुभारंभ के अवसर पर दुर्ग ब्लाक के ग्राम रिसामा के जनप्रतिनिधियों तथा स्व-सहायता समूह की महिलाओं से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर रिसामा के ग्रामीणों को बधाई देते हुए कहा कि रोका-छेका जैसी परंपरा फसल बचाव के लिए बहुत अच्छी परंपरा थी। हमने जो नरूवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजना आरंभ की है इसके माध्यम से और रोका-छेका जैसी परंपरा के माध्यम से खरीफ फसल को बचाने में और रबी फसल ले पाने में सहयोग मिलेगा। बाड़ी योजना के माध्यम से नैपियर घास मिलेगी और गौठान में पशुओं के लिए आश्रय, इस तरह से रोका-छेका सफल होगा और फसल भी बचेगी। गृह मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने भी रिसामा की महिलाओं की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अपने गौठान में ये महिलाएं इतने जतन से कार्य कर रही हैं जिसका जमीनी असर दिख रहा है। इस मौके पर कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाये गए उत्पादों का निरीक्षण किया। जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक ने उन्हें विस्तार से गौठान की गतिविधियों की जानकारी दी। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शालिनी यादव, जनपद अध्यक्ष श्री देवेंद्र देशमुख भी उपस्थित थे।
*सोलर पैनल की दी सौगात-*

           मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर रिसामा को सोलर पावर प्लांट की सौगात भी दी। इससे गलियों की लाइट के साथ ही चैक भी हाईमास्ट लाइट से रौशन होंगे। इसकी लागत एक करोड़ 61 लाख रुपए होगी। रिसामा के ग्रामीणों ने इसके लिए आभार जताया। 
*फिनाइल से लेकर बड़ी-बिजौरी तक  बना रहीं-*

             गाँव की सरपंच श्रीमती गीता महानंद ने बताया कि गौठान के शुरू होने से हमारा आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है। हम लोग कंपोस्ट खाद के साथ ही घरेलू उपयोग की बहुत सी वैरायटी तैयार कर रहे हैं। इसमें अगरबत्ती, फिनाइल, हैंडवाश, बड़ी-बिजौरी, गोबर के दीये आदि घरेलू उपयोग की बहुत सी सामग्री शामिल हैं। लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की श्रीमती ऊर्वशी चंद्राकर ने बताया कि उनके समूह ने 35 हजार रुपए मूल्य का कंपोस्ट खाद अब तक बेच लिया है। इसमें से 40 क्विंटल खाद तो उन्होंने अपने समूह के लिये ही खरीदा है जिसमें वे अपनी बाड़ी में नैपियर घास लगा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सबको अपनी बनाई हुई चीज से सबसे ज्यादा लगाव होता है। जब गाँव में ही जरूरत की चीजें बना लेंगी तो बाहर से सामान क्यों खरीदेंगे। स्वच्छता दीदी श्रीमती नीलेश्वरी यादव ने बताया कि वे घर-घर जाकर कचरा एकत्र करने का कार्य करती हैं और इसे पृथक कर विक्रय करती हैं। उन्होंने अभी इससे 3 हजार रुपए की आय अर्जित की है।
*अब जिमीकांदा, हल्दी और अदरक की फसल लेंगी-*

     प्रज्ञा स्व-सहायता समूह की सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य श्रीमती योगिता चंद्राकर ने बताया कि इस बार जिमीकांदा, हल्दी और अदरक की फसल लेने की योजना है। उन्होंने  कहा कि इसका रेट काफी अच्छा आता है। अब तक की सफलता शानदार रही है और अब हम लोग नये प्रयोग करना चाह रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैविध्य से ही आर्थिक तरक्की संभव होती है। रिसामा की महिलाएं बहुत अच्छा कार्य कर रही हैं।

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