Home » एलएसी गतिरोध ने भारतीय सेना को कर दिया और मजबूत

नई दिल्ली । पूर्वी लद्दाख में पिछले साल के अप्रैल महीने से भारत-चीन की सेनाओं के बीच तनावपूर्ण स्थिति चल रही है। दोनों देशों की सेनाओं ने एक लाख से ज्यादा जवानों को बॉर्डर पर तैनात कर रखा है। इस बीच, बजट डॉक्युमेंट्स से सामने आया है कि भारत ने पिछले साल नई सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए 20,776 करोड़ रुपये हथियारों की इमरजेंसी खरीद पर खर्च किए। इससे देश की सैन्य शक्ति में बढ़ोतरी हुई है। क्षमताओं के निर्माण पर खर्च किया गया पैसा पिछले साल आधुनिकीकरण के लिए आवंटित बजट से अधिक था। भारत ने पिछले बजट 2020-21 में पूंजीगत खर्च के रूप में 1.13 लाख करोड़ रुपये रखे थे, लेकिन सैन्य आधुनिकीकरण पर 1.34 लाख करोड़ खर्च किया गया।
चीन के साथ बॉर्डर पर जारी संघर्ष ने भारत को स्मार्ट एयर-टू-ग्राउंड हथियार, मिसाइल, रॉकेट, एयर डिफेंस सिस्टम्स, जीपीएस आधारित आर्टिलरी गोला-बारूद, टैंक के लिए गोला बारूद और असॉल्ट राइफलों की खरीद में तेजी लाने के लिए फोर्स किया। अमेरिका, रूस, फ्रांस और इजरायल उन देशों में से हैं, जहां से भारत ने पिछले साल हथियार इम्पोर्ट किए हैं। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि आवंटन में काफी बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2020-21 में आवंटन 18.75% और वित्त वर्ष 2019-20 में 30.62% की वृद्धि हुई। यह पिछले 15 वर्षों में पूंजी में सबसे अधिक वृद्धि है। सिरिल अमरचंद मंगलदास (एरोस्पेस एंड डिफेंस) के प्रमुख अनुज प्रसाद ने कहा कि खरीद के लिए बजटीय आवंटन में 18% की वृद्धि सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और हथियार में बढ़ोतरी की जरूरतों को दिखाती है। उन्होंने आगे कहा, ”यह देखते हुए कि पिछले वर्ष के लिए बजट में आवंटित की गई राशि से 20 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च हो गया, वर्तमान परिदृश्य और सैन्य तैयारियों को देखते हुए ज्यादा की आवश्यकता है। कुल मिलाकर, भारत ने अपने बजट में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए सैन्य खर्च के लिए 4.78 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं, जबकि पिछले साल के 4.71 लाख करोड़ रुपये थे। दोनों आंकड़ों में रक्षा पेंशन भी शामिल है। ये आंकड़े 1.45 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाते हैं। लेकिन यदि रक्षा पेंशन को हटा दें तो इस साल सेना पर होने वाला खर्च 3.62 लाख करोड़ रुपये का है। पिछले साल यह 3.37 लाख करोड़ था। इस तरह इसमें 7.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। बजट डॉक्युमेंट्स से पता चलता है कि पिछले साल के 1.33 लाख करोड़ की तुलना में इस बार 1.15 लाख करोड़ रक्षा पेंशन पर खर्च होगा। अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल पेंशन एरियर होने के चलते यह खर्च 18 हजार करोड़ रुपये अधिक था।

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