रायपुर छत्तीसगढ़ के किसान अब पारंपरिक धान की खेती के चक्र से बाहर निकलकर औषधीय फसलों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहे हैं। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व और छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसान वच (स्वीट फ्लैग) की व्यावसायिक खेती अपनाकर अपनी आय को कई गुना बढ़ा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक धान की खेती के अलावा वच की औषधीय खेती ने किसानों की तकदीर बदल दी है, विशेषकर वन अंचलों में। औषधीय पौधों की खेती से किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा मिल रहा है।
क्या है वच और क्यों है इसकी मांग?
वच, जिसे स्थानीय स्तर पर घोड़बच कहा जाता है, एक बहुउपयोगी औषधीय पौधा है। इसकी जड़ों का प्रयोग आयुर्वेद, हर्बल दवाओं, सौंदर्य प्रसाधन, सुगंधित तेल और अगरबत्ती निर्माण में प्रमुखता से किया जाता है। वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग ने इसे किसानों के लिए हरा सोना बना दिया है। औषधि पादप बोर्ड के माध्यम से किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
11 गांवों से हुई मुनाफे की शुरुआत
वर्तमान में धमतरी, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर और रायपुर जिलों के 11 गांवों में लगभग 38 एकड़ क्षेत्र में वच की खेती की जा रही है। राज्य सरकार के नई सुबह की ओर अभियान के तहत आदिवासी किसान अब ब्राह्मी और वच ;बचद्ध जैसी सुगंधित व औषधीय फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।