Home » लाल आतंक पर भारी पड़ा लोकतंत्र… नक्सलगढ़ में गूंजा राष्ट्रगान

लाल आतंक पर भारी पड़ा लोकतंत्र… नक्सलगढ़ में गूंजा राष्ट्रगान

by Bhupendra Sahu

नियद नेल्लानार के 10 दुर्गम गांवों में आजादी के बाद पहली बार लहराया तिरंगा

रायपुर बस्तर की सुदूर पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसे उन गांव जहाँ दशकों तक सिर्फ खौफ का साया था, आज राष्ट्रगान की गूँज सुनाई दी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और गृहमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में सुकमा जिले के 10 अति-संवेदनशील गांवों में आजादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया। यह केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि नक्सलवाद पर लोकतंत्र की निर्णायक जीत का शंखनाद है।

सुकमा के दुर्गम अंचलों के नियद नेल्लानार के गांव तुमालभट्टी, वीरागंगलेर, मैता, पालागुड़ा, गुंडाराजगुंडेम, नागाराम, वंजलवाही, गोगुंडा, पेदाबोडकेल और उरसांगल में पहली बार गणतंत्र दिवस का पर्व मनाया गया। सुरक्षा बलों की सतत तैनाती और नवीन कैंपों की स्थापना ने वह सुरक्षा घेरा प्रदान किया, जिसके कारण ग्रामीण दशकों के भय को त्यागकर मुख्यधारा से जुड़ने आगे आए।

प्रशासन की सक्रियता से इन गांवों में प्रशासन की पहुँच सुनिश्चित हुई है। बुजुर्गों से लेकर स्कूली बच्चों तक ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों के साथ तिरंगे को सलामी दी। ग्रामीणों की आँखों में सुरक्षित भविष्य की चमक इस बात का प्रमाण है कि शासन की ‘विश्वास आधारित नीति’ रंग ला रही है। सुरक्षा कैंपों के माध्यम से जवानों ने न केवल क्षेत्र को सुरक्षित किया, बल्कि ग्रामीणों का मित्र बनकर उनका दिल भी जीता।

पूना मारगेम (नया रास्ता) से बदलता हुआ सुकमा

छत्तीसगढ़ सरकार का अभियान “पूना मारगेम (गोंडी भाषा में जिसका अर्थ है नया रास्ता) अब हकीकत बनता दिख रहा है। सुदूर वनांचलों में तिरंगे का लहराना इस बात की पुष्टि करता है कि अब सुकमा में बंदूक की गूँज नहीं, बल्कि विकास और शांति की लहर चलेगी। जिला प्रशासन और पुलिस बल की इस साझा प्रतिबद्धता ने बस्तर में विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है।

Share with your Friends

Related Articles

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More