Home » विशेष लेख :मिलाराबाद के किसान अंतर्यामी ऑर्गेनिक खेती अपनाकर समाज में मिसाल पेश की

विशेष लेख :मिलाराबाद के किसान अंतर्यामी ऑर्गेनिक खेती अपनाकर समाज में मिसाल पेश की

by Bhupendra Sahu

रायपुर महासमुंद जिले के विकासखंड बसना के ग्राम मिलाराबाद के किसान शिक्षित किसान अंतर्यामी प्रधान और उनके पुत्र लक्ष्मी नारायण प्रधान ने पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती अपनाकर समाज के लिए मिसाल पेश की है। अंतर्यामी प्रधान बी.एससी. तक और लक्ष्मी नारायण प्रधान बैचलर इन फिजियोथेरेपी तथा बीजेएमसी की पढ़ाई की है। वे लगभग 29 एकड़ भूमि में ऑर्गेनिक खेती करते हुए इन्होंने यह साबित किया है कि कम लागत और स्वस्थ तरीके से भी किसान अच्छी आमदनी कमा सकते हैं।

गौरतलब है कि रासायनिक खेती के इस दौर में जहां किसान अधिक उपज की लालच में भूमि की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डाल रहे हैं। वहीं प्रधान परिवार ने तकरीबन सत्तर के दशक से रासायनिक खाद और जहरीली दवाइयों का उपयोग बंद कर ऑर्गेनिक खेती का आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। कम लागत, स्वस्थ उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त धान की किस्में उगाकर इन्होंने यह साबित किया है कि ऑर्गेनिक खेती ही भविष्य की सच्ची जरूरत है। आज इनके पास 29 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक खेती चल रही है, जिनमें से 15 एकड़ का एपीईडीए (APEDA) से रजिस्ट्रेशन भी हो चुका है।

विविध फसलें और खास किस्म का धान
किसान अंतर्यामी प्रधान ने बताया कि उनके खेती में कई उन्नत किस्म की फसलें लगाई गई हैं जिनमें धान में जवाफुल, कलानमक नरेंद्र 01, शाही नमक, कालीमुच, चिनौर कालाजीरा, गंगा बालू, दुबराज और सुपर फाइन जैसे उन्नत किस्म के धान का उत्पादन कर रहें है। इससे अच्छी आमदनी मिल रही है। वहीं यह उत्पाद स्वास्थ्य वर्धक भी है। सुपरफाइन किस्म की धान का कीमत लगभग 75 रूपए से शुरू है। काला नमक नरेंद्र कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला चावल होने के कारण इसका कीमत 250 रूपए किलो के लगभग है। अवाम धान बीज 350 रूपए किलो तक बिकता है। उन्होंने बताया कि वे धान फसलों के साथ-साथ अपने खेतों में शरबती गेहूं C-306 किस्म के और अरहर का भी फसल लेते हैै।इसके साथ ही कोयंबतूर 86032 किस्म के गन्ना का फसल लेते है जो गुड़ बनाने में काफी अच्छा है। इसकी कीमत 120 रूपए किलो तक है। वे अपने खेतों में ग्रीष्मकालीन मौसम में मूंगफली का फसल लेते है। चार एकड़ में टॉप-10 वैरायटी के आम का पेड़ लगाया हुआ है। जिससे प्रतिवर्ष 25-30 क्विंटल आम का उत्पादन होता है। नारियल के 160 पौधे लगाए है, जिनमें फल आना शुरू हो रहा है।

जैविक खेती का आधार – गाय
जैविक खेती कर रहे किसान प्रधान परिवार ने बताया कि उनके पास 60 देसी नस्ल की गायें हैं, जिनमें गिर नस्ल प्रमुख है। इनके गोबर और गोमूत्र से ही खाद, बीजामृत, जीवामृत और ‘ब्रह्मास्त्र’ जैविक दवा बनाई जाती है। किसान अंतर्यामी प्रधान का कहना है – “हम गाय को नहीं पालते, बल्कि गाय हमें और हमारे पूरे परिवार को पालती है।”

प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में नीम, सीताफल, करंज, भेरू, बेल और (अरंडी) के पत्ते है ब्रह्मास्त्र
अंतर्यामी प्रधान ने बताया कि प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में नीम, सीताफल, करंज, भेरू, बेल और आक (अरंडी) के पत्ते ब्रम्हास्त्र के रूप में काम करते है। इन पेड़ों के पत्तों की पेस्ट बनाकर गोमूत्र के साथ मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है। इसे फसलों पर छिड़कने से कीट और रोगों से बचाव होता है। किसान अंतर्यामी ने बताया कि इसके अलावा गाय के गोबर से गैस संयंत्र से रसोई की जरूरत पूरी होती है। उन्हें राज्य शासन सहित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल के अंतर्गत बीज और तकनीकी मदद मिलती है।

Share with your Friends

Related Articles

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More