श्रीनगर । कश्मीर घाटी से तीन दशक पहले पलायन कर चुके कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक रहा। बडगाम जिले के इचकूट गांव स्थित शारदा भवानी मंदिर के कपाट करीब 35 साल बाद पूजा-अर्चना के लिए खोले गए। इस अवसर पर न केवल पंडित समुदाय के लोग उपस्थित रहे, बल्कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।
मंदिर परिसर में ‘मुहूर्त’ और ‘प्राण प्रतिष्ठा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसे पंडित परिवारों के अपनी जड़ों और पैतृक स्थान पर लौटने के प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
“शारदा माता मंदिर की शाखा” – शारदा स्थापना समुदाय
शारदा स्थापना समुदाय के अध्यक्ष सुनील कुमार भट्ट ने कहा, “हम कह सकते हैं कि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर स्थित शारदा माता मंदिर की एक शाखा है। हम लंबे समय से इसे पुनः खोलना चाहते थे। स्थानीय मुसलमान भी यही चाहते थे और वे हमसे नियमित रूप से आकर आग्रह करते थे।”
भट्ट ने बताया कि पंडित समुदाय ने 35 साल बाद इस मंदिर के कपाट खोले हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आयोजन हर साल होगा और माता रानी से प्रार्थना की कि जल्द ही कश्मीरी पंडित पूरी तरह घाटी में लौट सकें।