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जर्जर मकान से मिला छूटकारा, अब पक्के मकान में हो रहा है गुजारा

by Bhupendra Sahu

रायपुर महल हो या झोपड़ी अपना घर अपना होता है, हर व्यक्ति का एक सपना होता है कि छांव के लिए उसका एक खुद का आशियाना हो, लगभग 55 साल के लतेल दास मंहत अब खुद के पक्के मकान में रहकर सुकून की नींद ले रहे है। वर्षों तक खपरैल वाले कच्चे मकान में हर बरसात से जूझने वाले लतेल दास को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिला है। अब उन्हें हर साल बरसात के पहले खपरैल पलटने की चिंता नहीं सताती और न ही टपकती छत और दरकती दीवारों की चिंता होती है।

सक्ती जिले के विकासखण्ड सक्ती अंतर्गत ग्राम नंदौरखुर्द निवासी श्री लतेल दास खेती-किसानी से गुजर-बसर करते है। लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति और दुर्गम परिस्थितियों के चलते वे पक्का घर नहीं बना सके। हर साल बारिश का मौसम उनके लिए मुसीबत लेकर आता था। कभी खपरैल उड़ जाती थी, कभी दीवारें दरक जाती थीं। श्री लतेल दास बताते हैं कि जैसे-तैसे बनाया गया कच्चा मकान हर साल बरसात में बर्बाद हो जाता था। हर बार बारिश आने से पहले खपरैल को ठीक करना पड़ता था, फिर भी पानी टपकता रहता था। दीवारें भी बारिश के बाद कमजोर हो जाती थीं। फिर उन्हें जानकारी मिली कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्हें भी पक्का मकान मिल सकता है। फॉर्म भरने और पात्रता मिलने के बाद योजना का लाभ मिला और अब उनका अपना मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ पक्का आवास बनकर तैयार हो गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले इस आवास ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी है। श्री लतेल दास कहते हैं कि हमारे लिए सरकार ने जो किया है, उसके लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं। श्री लतेल दास की यह कहानी न सिर्फ प्रधानमंत्री आवास योजना की सफलता को बयां करती है, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और स्थिरता के नए युग की शुरुआत को भी बयां करती है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले इस आवास ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी है। सरकार से मिली मदद के लिए उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया है।

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