नई दिल्ली । गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर गृह मंत्रालय ने इस साल के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी। बिहार की जानी मानी लोक गायिका शारदा सिन्हा और जापान के दिवंगत व्यवसायी ओसामु सुजुकी समेत तीन को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिया जाएगा। देश के पहले सिख सीजेआई जगदीश सिंह खेहर भी पद्म विभूषण पाने वाली सात शख्सियतों में शामिल हैं। इसके अलावा 19 शख्सियतों को (चार मरणोपरांत) पद्म भूषण और 113 लोगों को (छह मरणोपरांत) पद्म श्री पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
पद्म भूषण पाने वालों में प्रसार भारती के पूर्व चेयरमैन ए. सूर्य प्रकाश, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार रहे विवेक देबरॉय (मरणोपरांत), जाने माने गायक पंकज उदास (मरणोपरांत), फिल्म निर्माता शेखर कपूर, बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (मरणोपरांत) प्रमुख नाम हैं।
साथ ही बिहार के जाने माने लोक सेवक और पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल (मरणोपरांत), जानेमाने व्यवसाई पवन गोयनका, क्रिकेटर आर. आश्विन सहित 113 शख्सियतों को पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है।
देश के जानेमाने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. डी. नागेश्वर रेड्डी को मेडिसिन के क्षेत्र में पद्म विभूषण देने की घोषणा की गई है। उनके पास लगभग 50 साल का अनुभव है। उन्होंने कुरनूल मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ से जनरल मेडिसिन में एमडी की पढ़ाई की। इसके बाद, उन्होंने पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ से गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में डीएम की डिग्री हासिल की।
देश के पहले सिख सीजेआई न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जगदीश सिंह खेहर को सार्वजनिक मामलों (पब्लिक अफेयर्स) के क्षेत्र में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। 4 जनवरी 2017 को जस्टिस जगदीश सिंह खेहर ने सुप्रीम कोर्ट के पहले सिख मुख्य न्यायाधीश के रूप में इतिहास रचा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में छह साल बिताए, जिसमें आठ महीने तक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। अपने छह साल के कार्यकाल के दौरान, न्यायमूर्ति खेहर ने कुल 176 निर्णय दिए। साल 2014 में उन्होंने 34 फैसले सुनाए और 63 पीठों का हिस्सा बने।
जानी मानी कथक नृत्यांगना और कोरियोग्राफर कुमुदिनी रजनीकांत लाखिया को कला (डांस) के क्षेत्र में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने 1967 में भारतीय नृत्य और संगीत के क्षेत्र में कदम्ब स्कूल ऑफ डांस एंड म्यूजिक की स्थापना की। समकालीन कथक नृत्य में उनके योगदान को प्रमुख माना जाता है।
कर्नाटक के लक्ष्मीनारायण सुब्रमण्यम को कला (म्यूजिक) के क्षेत्र में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले उन्हें 1987 में पद्म श्री और 2010 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है।
कर्नाटक संगीत के साथ-साथ पश्चिमी शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित एक प्रसिद्ध वायलिन वादक डॉ. लक्ष्मीनारायण सुब्रमण्यम को कला के क्षेत्र में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। संगीत में उनका करियर 1973 में शुरू हुआ, और तब से उन्होंने 200 से ज्यादा रिकॉर्डिंग अपने नाम की है। उन्होंने प्रसिद्ध संगीतकारों जैसे येहुदी मेनुहिन, स्टीफन ग्रेपेली, रग्गिएरो रिक्की, जीन-पियरे रामपाल, हर्बी हैनकॉक, जॉर्ज हैरिसन और अन्य के साथ काम किया। साल 1988 में उन्हें पद्म श्री और 2001 में पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिले थे।
भारत के सर्वकालिक महान लेखकों में से एक एम.टी. वासुदेवन नायर को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। वह भारत के उन लेखकों में शुमार थे, जिनकी रचनाओं का अनुवाद हर भाषा में मिलता है। वह सुप्रसिद्ध पत्रिका मातृभूमि के संपादक भी रहे। इससे पहले 2005 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
जापान के दिवंगत व्यवसायी ओसामु सुजुकी को व्यापार और उद्योग (ट्रेड एंड इंडस्ट्री) के क्षेत्र में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। वह एक जापानी व्यवसायी थे और सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष रहे। साल 1978 से वह कंपनी के अध्यक्ष, चेयरमैन या सीईओ के पद पर थे। फरवरी 2021 में कंपनी ने यह घोषणा की कि वह जून 2021 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
देश की प्रसिद्ध दिवंगत लोक गायिका शारदा सिन्हा को कला (संगीत) के क्षेत्र में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। शारदा सिन्हा ने अपनी मधुर आवाज से न केवल भोजपुरी और मैथिली संगीत को नई पहचान दिलाई, बल्कि बॉलीवुड में भी अपनी गायकी का लोहा मनवाया। उनकी आवाज में सलमान खान की फिल्म “मैंने प्यार किया” का गाना “कहे तो से सजना” बहुत ही लोकप्रिय हुआ। इसके अतिरिक्त, उन्होंने “गैंग्स ऑफ वासेपुर पार्ट 2” और “चारफुटिया छोकरे” जैसी फिल्मों में भी गाने गाए, जिनकी दर्शकों ने बहुत सराहना की।