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युवा प्रतिभा और मानव संसाधनों को दिशा देने के लिए उद्योग अकादमिक सहयोग महत्वपूर्ण: डॉ. मनसुख मंडाविया

by Bhupendra Sahu

नईदिल्ली। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने शुक्रवार को रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा के साथ नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी. के. पॉल की उपस्थिति में एनआईपीईआर अनुसंधान पोर्टल का शुभारंभ किया। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एनआईपीईआर) एक ऐसा अनुसंधान पोर्टल है जहां सभी एनआईपीईआर और उनकी शोध गतिविधियों, पेटेंट दायर और प्रकाशन जानकारी के बारे में सूचनाओं को एक स्थान पर प्रसारित करने के उद्देश्य से बनाया गया है, ताकि उद्योग और अन्य हितधारक उनके बारे में जान सकें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान को दोहराते हुए डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि अनुसंधान और विकास देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि हमें सभी हितधारकों की आकांक्षाओं की इस ऊर्जा का उपयोग करने और एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जेनरिक में हमारी विशेषज्ञता का अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार किया जा सकता है।

द्योग और शिक्षा जगत दोनों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के महत्व की ओर इशारा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रतिस्पर्धा और मांग अनुसंधान व नवाचार की आवश्यकता हैं, क्योंकि यह हमारे नागरिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण विचारों और समाधानों को बढ़ावा देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि फार्मास्युटिकल क्षेत्र में निरंतर विकास के लिए अनुसंधान और नवाचार की आवश्यकता है।
मंत्री ने कहा कि देश में पहले से ही युवा प्रतिभा और मानव संसाधन हैं, लेकिन हमें उन्हें उद्योग-अकादमिक सहयोग के माध्यम से प्रभावी ढंग से व्यवस्थित करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ाने के लिए फार्मास्युटिकल विभाग ने सभी सात एनआईपीईआर की अनुसंधान गतिविधियों पर पकड़ बनाने के लिए यह शोध पोर्टल बनाया है।
भगवंत खुबा ने कहा कि भारत तीसरा सबसे बड़ा दवा निर्माण करने वाला देश है और हमारी वैक्सीन विकास की कहानी हितधारकों के बीच प्रभावी सहयोग का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म सभी एनआईपीईआर के अनुसंधान और कार्यों पर निगाह रखेगा। उन्होंने आगे कहा कि सरकार अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और यह पोर्टल उसी दिशा में एक अगला कदम है।
डॉ. वी. के. पॉल ने भारत की स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में एनआईपीईआर द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिकाओं को याद किया। उन्होंने सरकार से फंडिंग पाइपलाइन को सुव्यवस्थित करने और आवंटित बजट में तेजी लाने का अनुरोध किया। उन्होंने उद्योग से प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए एनआईपीईआर अनुसंधान कोष की तरह सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने एनआईपीईआर को हितधारकों के साथ जुड़कर और युवा पीढ़ी के विचारों को संगठित करके अकादमिक स्वायत्तता को बढ़ावा देने और अपने शोध लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जीवंत वैज्ञानिक समूह बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
एनआईपीईआर के अनुसंधान कार्यक्रम के महत्व पर जोर देते हुए, जो समय की जरूरतों पर केंद्रित है इस पर फार्मास्युटिकल विभाग की सचिव सुएस. अपर्णा ने कहा कि वैश्विक महामारी के पिछले दो वर्षों की तुलना में अनुसंधान और नवाचार का महत्व कभी भी अधिक महत्वपूर्ण और स्पष्ट नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि हमने मानव जाति की मदद के लिए नई दवा, पुन: उपयोग की जाने वाली दवा, सुरक्षित दवा, अधिक प्रभावकारी दवा और सबसे सस्ती दवाओं की आवश्यकता देखी है। इस बात पर प्रकाश डाला कि पोर्टल अनुसंधान कार्य को बढ़ावा देगा जो इस क्षेत्र की वर्तमान विकसित जरूरत और रोगियों की आवश्यकताओं के लिए अधिक प्रासंगिक है।
इस पोर्टल का उद्देश्य चल रहे शोध कार्यों की उपलब्धता को प्रमाणित करना है। यह अन्य शोधकर्ताओं और विशेष रूप से उद्योग को संबंधित संगठन के संपर्क में आने में मदद करेगा ताकि वे एक साथ काम कर सकें और शोध को अधिक उद्देश्यपूर्ण एवं सार्थक बना सकें। लंबे समय से शोध संस्थान सीमित दायरे में रहकर या एकांतवास में काम कर रहे हैं। यह अनुसंधान पोर्टल सरकार के भीतर विभिन्न विभागों में फैले अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के साथ इन संस्थानों को भी एक साथ लाने का प्रयास करेगा। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने सभी प्रासंगिक अनुसंधान संस्थानों जैसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग, आयुष मंत्रालय, आईसीएमआर आदि और यहां तक कि डीआरडीओ से भी अनुरोध किया, जहां फार्मास्युटिकल क्षेत्र से संबंधित बहुत सारे शोध होते हैं उनको इस पोर्टल से जुडऩे का आग्रह किया है।
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