Home » समाज प्रमुखों का महत्वपूर्ण सुझाव : जन-जागृति अभियान चलाकर धीरे-धीरे लागू की जाए शराब बंदी : चुनिंदा स्थानों पर हो शराब दुकान, समय-सीमा में हो कटौती

समाज प्रमुखों का महत्वपूर्ण सुझाव : जन-जागृति अभियान चलाकर धीरे-धीरे लागू की जाए शराब बंदी : चुनिंदा स्थानों पर हो शराब दुकान, समय-सीमा में हो कटौती

by Bhupendra Sahu
  • अबकारी नियमों का कड़ाई से हो पालन, नई पीढ़ी को नशापान से बचाने हुक्का-बारों पर किया जाए कड़ी कार्रवाई
  • प्रदेश में शराब बंदी के लिए सामाजिक संगठनों की गठित समिति की प्रथम बैठक संपन्न

रायपुर / राज्य में पूर्ण शराब बंदी के लिए सरकार द्वारा गठित की गई सामाजिक संगठनों की बैठक में शराब बंदी के लिए रणनीति और इस दिशा में आगे बढ़ने तथा इस कदम से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। नवा रायपुर के वाणिज्यक कर भवन में आयोजित इस बैठक में पूर्ण शराबंदी को लेकर जन चेताना अभियान और नशाबंदी अभियान सहित विभिन्न मुद्दों पर सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी राय और विचार रखे। सभी समाजिक प्रतिनिधियों ने पूर्ण शराब बंदी पर सहमति जताई और कहा कि शराब बंदी एकाएक लागू नहीं की जानी चाहिए। बैठक में शराब बंदी हेतु सुझाव देने के लिए गठित समितियों के विभिन्न राज्यों में अपनायी गई नीतियों और इसके प्रभावों के अध्ययन के लिए भ्रमण पर जाने के लिए सहमति प्रदान की गई।

शराब बंदी के लिए सामाजिक संगठनों की गठित समिति की प्रथम बैठक में समाज प्रमुखों ने कहा कि जन स्वास्थ्य और लोगों की सामाजिक-आर्थिक तथा पारिवारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पूर्ण शराब बंदी जरूरी है। लेकिन एकाएक शराब बंदी लागू नहीं की जानी चाहिए। इससे शराब के आदी लोगों को इससे स्वास्थ्यगत कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है। अवैध और जहरीली शराब के सेवन से उन्हें जान तक गवांनी पड़ सकती है। इसलिए सभी पहलुओं पर विचार के बाद ही चरण बद्ध ढंग से शराब बंदी की पहल की जानी चाहिए। सामाजिक संगठनों की बैठक में देश के ऐसे राज्य जहां शराब पूर्ण रूप से बंदी है तथा ऐसे राज्य जहां पूर्ण शराब बंदी के बाद इसे पुनः हटाया गया। इसके पीछे के कारणों और तथ्यों के विशलेषण पर भी जोर दिया गया। बैठक में सामाजिक प्रतिनिधियों ने कहा कि आज कल युवा पीढ़ी में नशा एक फैशन बनते जा रहे है। नशे के रूप में युवा दवाईयों तथा अन्य साधन जैसे गुटखा, तम्बाखू का उपयोग कर रहे हैं, इस पर कड़ाई से रोक लगाए जाने की जरूरत है।

समाज प्रमुखों ने बैठक में सुझाव देते हुए कहा कि प्रदेश में पूर्ण शराब बंदी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए चुनिंदा स्थानों पर शराब की दुकान हो और शराब विक्रय की समय-सीमा में भी कटौती की जानी चाहिए। आबकारी नियमों का कड़ाई पालन सुनिश्चित हो तथा नियमों एवं कानून-व्यवस्था का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि राज्य में पूर्ण शराब बंदी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए समाज प्रमुखों, राजनीतिक और प्रशासनिक समिति गठित की गई है। इन समीतियों के सदस्यों को शराब बंदी करने वाले राज्यों और ऐसे राज्य जहां शराब बंदी लागू थी लेकिन फिर शराब बंदी हटा ली गई उन राज्यों में जाकर इन सबके पीछे के कारणों और प्रभावों के अध्ययन की जिम्मेदारी दी गई है। बैठक में अपर आयुक्त श्री राकेश मंडावी, श्री रायसिंह ठाकुर, तीनों समितियों के नोडल अधिकारी श्री राजीव कुमार झा सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
शराबबंदी के लिए पायलेट प्रोजेक्ट बलरामपुर जिले में
आबकारी विभाग के सचिव श्री निरंजन दास ने बैठक में बताया कि राज्य सरकार द्वारा लगभग 50 शराब दुकान बंद किए गए हैं। इसके अलावा एफएल-2 लायसेंस बनाने पर प्रतिबंध किया हुआ है। प्रदेश में एक भी बीयर बार संचालित नहीं है। एफएल-3 लायसेंस बनाने की प्रक्रिया को भी कठिन करते हुए केवल सितारा होटलों को ही लायसेंस देने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार शराब बंदी के लिए व्यापक जन चेतना अभियान चला रही है। प्रदेश की महिलाओं को नशा विरोधी अभियान में जोड़कर नशा के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार धीरे-धीरे शराब बंदी करने की दिशा में बलरामपुर जिले को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में लेकर देशी शराब विक्रय पर पूर्णतः प्रतिबंध किया हुआ है। बलरामपुर जिले में मात्र पांच अंग्रेजी शराब की दुकान ही संचालित हो रही है। धीरे-धीरे इसे भी बंद करने की रणनीति पर काम चल रहा है। यहां शराब बंदी की स्थिति का अवलोकन कर प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।

Share with your Friends

Related Articles

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More