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डुड़िया में पर्यावरण रक्षक टीम ने बैंड-बाजे के साथ नाचते गाते हुए रैली निकालकर किया पौधरोपण…

by Bhupendra Sahu

अर्जुन्दा / बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड के अन्तर्गत ग्राम डुड़िया के पर्यावरण रक्षक टीम और ग्रीन कमाण्डों विरेन्द्र सिंह कि अगुवाई में पत्रिका के “हरित प्रदेश अभियान” के तहत विशाल पौधरोपण किया और सुरक्षा का संकल्प भी लिया। हमारे देश भारत की संस्कृति एवं सभ्यता वनों में ही पल्लवित तथा विकसित हुई है यह एक तरह से मानव का जीवन सहचर है वृक्षारोपण से प्रकृति का संतुलन बना रहता है वृक्ष अगर ना हो तो सरोवर (नदियां ) में ना ही जल से भरी रहेंगी और ना ही सरिता ही कल कल ध्वनि से प्रभावित होंगी वृक्षों की जड़ों से वर्षा ऋतु का जल धरती के अंक में पहुँचता है, यही जल स्त्रोतों में गमन करके हमें अपर जल राशि प्रदान करता है वृक्षारोपण मानव समाज का सांस्कृतिक दायित्व भी है, क्योंकि वृक्षारोपण हमारे जीवन को सुखी संतुलित बनाए रखता है। वृक्षारोपण हमारे जीवन में राहत और सुखचैन प्रदान करता है। वृक्षारोपण का कार्य सिर्फ शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी नही अपितु पूरे समाज और संगठन की भी है जो पर्यावरण को संरक्षित रखने में अपना योगदान दे, इस बीच एक परिवार एक पेड़ का संकल्प ले कर हर परिवार एक पेड़ जरूर लगये। जिस के साथ वृक्षारोपण कर संरक्षित रखने का संकल्प लिया और कहा समाज को जागरूक करने की पहली कड़ी घर परिवार होता है परिवार जागरूक होगा तो समाज जागरूक होगा।

वृक्ष धरा के आभूषण :- पर्यावरण रक्षक,स्वंय सेवक यशवंत टंडन

वृक्ष धरती के आभूषण है,ये हमारी शान है,वृक्ष है, तो हम है। वृक्ष हमारे जीवित रहने की वजह है, हमारे जीने का सहारा है। वृक्ष पशु-पक्षियों का आवास है। धरती पर जीवों को जीवन प्रदान करने वाली आक्सीजन और जल का मुख्य साधन भी जल है। वृक्ष हमें गर्मी से बचाते हैं।
“वृक्ष लगाओं, धरती को बचाओं वृक्ष लगाओं,घुटन भरे जीवन से छुटकारा पाओं हम सबने यह ठाना है, घर-घर वृक्ष लगाना है।”

वृक्षों को धरा का आभूषण कहा गया है। जिस प्रकार बिना आभूषण कोई स्त्री सौन्दर्य विहीन लगती है वैसे ही वृक्षों के बिना धरती सौन्दर्य विहीन विरान दिखाई देती है। हिन्दू धर्म ग्रंथों में वृक्षों को देवी-देवताओं की संज्ञा दी गई है, इन्हें पूजा जाता है। वृक्ष हमारा पालन-पोषण करते हैं,हम सदियों से इनकी पूजा करते आ रहे हैं। वृक्ष के बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। पृथ्वी पर हरियाली ही उसका श्रृंगार है और यह वृक्षों के द्वारा ही संभव है। किन्तु यह सब जानते समझते हुए भी हम वृक्षों की अंधाधुंध कटाई कर रहे हैं, जिसके भंयकर परिणाम हमारे सामने हैं। बढ़ता हुआ धरती का तापमान,तपता वायुमंडल, पिघलती ध्रुवों की बर्फ प्रलय की चेतावनी दे रही है। वृक्ष की जड़ें गहराई तक जाकर मृदा को बांधे रखती है, जिससे बरसात में मृदा का बहाव रूक सकें। इन सब परिस्थितियों को देखते हुए वृक्षों की उपयोगिता पर हमारा ध्यान केंद्रित होना आवश्यक है। हमें अधिक से अधिक वृक्ष लगाने हेतु दृढ़ संकल्पित होना चाहिए जिससे धरती पुनः अपना श्रृंगार कर हरी भरी हो सकें।

पर्यावरण के जूनून ने बनाया ग्रीन कमाण्डों
बालोद जिले के दल्लीराजहरा निवासी विरेन्द्र सिंह पिछले 20 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में योगदान दें रहें हैं। और लोगों को पर्यावरण बचाने के लिए गांव गांव जाकर प्रेरित व जागरूक कर रहे हैं इनके पर्यावरण के प्रति प्रेम और समर्पण ने उसे “ग्रीन कमाण्डों” बना दिया। अभियान में इनकी रही भूमिका:- पर्यावरण रक्षक व राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवक यशवंत कुमार टंडन, श्रीमती सविता टंडन,दामिनी टंडन,दीपिका देशलहरे, निकिता देशलहरे,निधि देशलहरे,थलेश टंडन, हेमंत कुमार टंडन,अनमोल टंडन, प्रियांचल टंडन,गुलशन टंडन, तरूण टंडन,संतलाल देवांगन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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