Home » जाने क्या है विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम, कोर्ट में गवाही देने से न डरे

जाने क्या है विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम, कोर्ट में गवाही देने से न डरे

by admin

कोरबा| विटनेस प्रोटक्शन स्कीम से गवाहों को सुरक्षा मिलेगी ,गंभीर प्रकृति के अपराधों से जुड़े गवाहों को धमकाने वाले अपराधियो पर कानूनी कार्यवाही होगी विटनेस प्रोटक्शन स्कीम लागू हो जाने से संगीन अपराधों से संबंधित गवाहों को सुरक्षा दी जाएगी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित होने वाली स्टैंडिंग कमेटी गवाहों को सुरक्षा देने का मानक तय करेगी। ऐसा होने से गवाहों को होस्टाइल कराकर अपराधियों के बरी होने में कमी आएगी।
आपराधिक मुकदमों की सुनवाई के दौरान गवाहों की सुरक्षा नहीं होने से उनकी जान माल के खतरे की आशंका बनी रहती है। गवाहों को सुरक्षा नहीं मिलने से उनके होस्टाइल हो जाने की आशंका बढ़ जाती है। अपराधी गवाहों को धमका कर उन्हें गवाही देने से मुकरने के लिए मजबूर कर देते हैं। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर देश की शीर्षस्थ अदालत ने वर्ष 2018 में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने महेंद्र चाबड़ा अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य की सुनवाई करने के बाद पांच दिसंबर 2018 को पारित निर्णय में गवाहों को सुरक्षा देने का निर्देश सरकार को दिया था।
*स्टैंडिंग कमेटी का गठन*

RO 12737/ 72

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में जिले में सक्षम प्राधिकारी के रूप में स्टैंडिंग कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी की अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायाधीश करेंगे। इसमें जिलाधिकारी/अभियोजन प्रमुख और पुलिस अधीक्षक सदस्य बनाए गए हैं। हत्या, दुष्कर्म, डकैती जैसे गंभीर प्रकृति के गवाहों के साथ ही अन्य आपराधिक मुकदमों के गवाहों को सुरक्षा दिलाई जाएगी।
*क्या करना होगा*
स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष संबंधित गवाहों को सुरक्षा के लिए आवेदन करना होगा। कमेटी पूरे मामले की जांच करने के बाद गवाह को सुरक्षा देने का आदेश जारी करेगी। गवाहों को सुरक्षा मिलने के निर्णय से गवाहों को धमकाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले अपराधी सजा से नहीं बच पाएंगे।

Share with your Friends

Related Articles

Leave a Comment

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More