Home » शराब पीने से कोरोना वैक्सीन का असर होगा कम

लंदन । अगर आप कोरोना वायरस वैक्सीन लेने के बारे में सोच रहे हैं तो शराब से दूरी बनाना आपके लिए जरूरी होने वाला है। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि शराब पीने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है। उन्होंने सलाह दी है कि एक दिन पहले या बाद में शराब पीने से वैक्सीन का असर कम हो सकता है। जानकारी के मुताबिक इमर्जेंसी मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ रॉन्क इखारिया ने ब्लड सैंपल पर एक्सपेरिमेंट किया है। शराब पीने से पहले और बाद में ये सैंपल लिए गए थे। उन्होंने पाया कि तीन गिलास शराब का असर साफ देखा गया जिनके कारण लिम्फोसाइट की संख्या 50 प्रतिशत कम हो गई थी।
व्हाइट ब्लड सेल्स में 20-40 फीसदी तक ‎लिम्फोसाइट लिम्फोसाइट होते हैं। इस प्रयोग में सामने आया है कि शराब पीने से शरीर में रहने वाले ऐसे सूक्ष्मजीवियों पर असर पड़ता है जो हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस से हमारे शरीर को बचाते हैं। इसकी वजह से हमारे खून में मौजूद व्हाइट ब्लड सेल्स को नुकसान पहुंचता है। व्हाइट ब्लड सेल्स में मौजूद लिम्फोसाइट ही वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए ऐंटीबॉडी बनाते हैं। इम्यूनॉलजिस्ट प्रफेसर शीना क्रूकशैन्क का कहना है कि इसकी वजह से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि कोविड-19 वैक्सिनेशन के आसपास शराब से दूरी बनाकर रखें। लिम्फोसाइट वे सेल होते हैं जो यह तय करते हैं कि वायरस जैसे हमलावर के खिलाफ कैसे लड़ना है। रूसी वैज्ञानिक अलेक्सजेंडर गिनटसबर्ग के मुताबिक हम स्पूतनिक वी वैक्सीन लगाने से तीन दिन पहले और बाद तक शराब न पीने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि कई प्रयोग में ये समय दो महीने भी बताया गया है। एलेक्जेंडर गामालेया नेशनल सेंटर आफ ए‎पिडेमीयोलाजी एंड माइक्रोबायलाजी मॉस्को में अध्यक्ष हैं और उन्हीं की देखरेख में वैक्सीन तैयार की गयी है।
गौरतलब है कि ब्रिटेन में फाइजर और आक्सफोर्ड-आस्ट्राजेनेका की वैक्सीन दी जा रही है जबकि अमेरिका में फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन दी जा रही है। भारत में एक्सपर्ट कमिटी की सिफारिश के बाद ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने सीरम इंस्टिट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को भारत में इमर्जेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है। इसके अलावा जायडस कैडिला की वैक्सीन जाइकोव-डी को तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के लिए मंजूरी मिल गई है। बता दें ‎कि दुनिया भर के करीब 20 देशों में या तो किसी न किसी वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी है या फिर इमरजेंसी वैक्सीनेशन शुरू भी हो चुका है।

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