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दृष्टिहीन बच्चों को 20 लाख की सौगात, आंगनबाड़ी व्यवस्थाओं पर सख्ती

by Bhupendra Sahu

रायपुर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के दौरे पर पहुँचीं महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने एक ही दिन में संवेदनशीलता और सख़्ती दोनों का परिचय दिया। नेत्रहीन एवं दिव्यांग बच्चों को जहाँ उन्होंने 20 लाख रुपये की सौगात दी, वहीं विभागीय समीक्षा बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों की लापरवाही पर अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए।

आमाखेरवा स्थित नेत्रहीन एवं विकलांग शिक्षण-प्रशिक्षण विद्यालय पहुँचकर मंत्री राजवाड़े का पारंपरिक स्वागत हुआ। बच्चों ने संगीत और कला प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। इस अवसर पर संस्था ने भवन मरम्मत, भरण-पोषण व कर्मचारियों के मानदेय सहित कई मांगें रखीं।

मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि दिव्यांग बच्चे समाज की असली धरोहर हैं, इनके भविष्य को संवारना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।उन्होंने तत्काल 20 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत करने की घोषणा की और अन्य मांगों पर शीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया।

कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल भवन नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की नींव हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि,सभी आंगनबाड़ी केंद्र समय पर खुलें और बंद हों।केंद्रों में स्वच्छता सर्वाेच्च प्राथमिकता हो ताकि किसी प्रकार का खतरा न हो।बच्चों के भोजन में पौष्टिकता का विशेष ध्यान रखा जाए, मुनगा पत्ती को सप्ताह में 2-4 बार अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।साथ ही उन्होंने सुपरवाइजरों को चेतावनी दी कि निरीक्षण में लापरवाही पाई गई तो जवाबदेही तय होगी।

बैठक में मंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महतारी वंदन योजना और महिला कोष ऋण योजनाओं के सही क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इनका लाभ केवल पात्र हितग्राहियों तक पहुँचना चाहिए।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब हम बच्चों, महिलाओं और दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएँगे। सरकार की हर योजना का असली लाभ सबसे अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचना ही हमारी प्रतिबद्धता है।

 

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