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विशेष लेख : स्वच्छता दीदीयां काम करती हैं तब शहर स्वच्छ है

by Bhupendra Sahu

देवराम यादव, सहायक सूचना अधिकारी (जनसंपर्क)

सारंगढ़-बिलाईगढ़ ‘‘स्वच्छ भारत मिशन: एक कदम स्वच्छता की ओर’’ और ‘‘स्वच्छ छत्तीसगढ: मिशन क्लीन सिटी़’’ वाक्य को स्वच्छता दीदियों ने अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। यूं रोजमर्रा की जिंदगी में आम लोग कहां कुछ कर पाते हैं। अपना घर-गलियां ठीक ढंग ने साफ नहीं करते मगर स्वच्छता दीदियां रोज आती हैं शहर की गलियों में, चाहे धूप हो या बरसात हो। राज्य सरकार स्वच्छता दीदियों को सम्मान के रूप में पारिश्रमिक 6000 रूपये प्रतिमाह दे रही हैं।

अच्छी बात है कि इस मानदेय पर स्वच्छता दीदीयां खुश हैं। खुशी-खुशी काम कर रही हैं। स्वच्छता दीदियों की इच्छा शक्ति-हौसला ही मुख्य है, जो रोज शहर को साफ करने के लिए तैयार रहती है और गंदगी को भगा देती हैं। सुबह 8 बजे से दोपहर तक भोजन अवकाश के बाद फिर शाम 4 बजे तक ये लगातार सफाई काम करती हैं। सूखा और गीला कचरा, प्लास्टिक वस्तुएं, कई प्रकार के कचरा को खुशी से निडर होकर योद्धा की तरह साफ करती हैं। झाडू, ई-रिक्शा, ट्रायसायकल स्वच्छता दीदियों के सहायक हैं। मणि कंचन केन्द्र में कचरे का पृथक्करण, पैकेजिंग फिर रिसायकल के लिए फैक्ट्री आदि को भेजना और छत्तीसगढ़ सरकार के नरवा गरूवा घुरवा बारी कार्यक्रम अंतर्गत जैविक खाद निर्माण करना इनके दैनिक कार्यों में शामिल है। नगरपालिका परिषद सांरगढ़ अंतर्गत संचालित मणिकंचन केन्द्र सारंगढ़ में कार्यरत स्वच्छता दीदी संध्या साहनी और धनमती साहनी ने कहा कि हम ये कार्य अपनी फर्ज समझकर खुशी-खुशी करते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि हमें रोजगार दिया इसके लिए राज्य सरकार के हम आभारी हैं। उन्होंने हमें ऐसे सफ़ाई सेवा देने के लिए अवसर प्रदान किया।

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