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मार्च तिमाही में रिकॉर्ड 12.3 लाख करोड़ रुपये की नई परियोजनाएं

by Bhupendra Sahu

नईदिल्ली। पिछले वित्त वर्ष की मार्च तिमाही में रिकॉर्ड नई परियोजनाएं आईं, जो कुछ बड़ी निवेश योजनाओं का नतीजा हो सकती हैं। मार्च 2023 में समाप्त तिमाही के दौरान 12.3 लाख करोड़ रुपये की नई परियोजनाएं आईं।

परियोजनाओं पर नजर रखने वाले सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इकॉनमी (सीएमआईई) से प्राप्त पूंजीगत व्यय के आंकड़ों से पता चला है कि जनवरी-मार्च, 2022 की 8.64 लाख करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं के मुकाबले 42.6 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। दिसंबर तिमाही में आई 6.9 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की तुलना में यह 78 प्रतिशत की बढ़त है।

समझा जा रहा है कि कुछ बड़े क्षेत्रों में आए बड़े ऑर्डर इसकी प्रमुख वजह हो सकते हैं। विश्लेषकों के अनुसार यह बढ़ोतरी तब हुई है, जब निजी क्षेत्र की कंपनियां पूंजीगत निवेश करने में काफी सतर्कता बरत रही हैं। नई परियोजनाओं में सरकारी सड़क परियोजनाएं और कंपनियों द्वारा लगाए जाने वाले नए संयंत्र दोनों ही शामिल हो सकती हैं या वस्तु एवं सेवा मुहैया करने के लिए क्षमता विस्तार इसकी वजह हो सकती है। समझा जा रहा है कि नई परियोजनाओं में बढ़ोतरी की मुख्य वजह वस्तु एवं सेवा आपूर्ति ढांचा मजबूत बनाने पर आया खर्च है।

बैंक ऑफ बड़ौदा में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि परिवहन क्षेत्र में 7.5 लाख करोड़ रुपये के ऑर्डर का नई परियोजनाओं में हुई वृद्धि में शायद प्रमुख योगदान रहा होगा। इससे पहले 2009 में एक तिमाही में 10 लाख करोड़ रुपये मूल्य की परियोजनाएं आई थीं। सबनवीस ने कहा कि यह परिवहन क्षेत्र में आया सबसे बड़ा ऑर्डर है।

एचडीफसी सिक्योरिटीज में प्रमुख (खुदरा शोध) दीपक जसानी के अनुसार परिवहन के अलावा अभियांत्रिकी, वाहन और ई-वाहन खंड से जुड़ी कंपनियों तथा सीमेंट क्षेत्र में निवेश आ रहा है। उन्होंने कहा, ‘निजी क्षेत्र से पूंजीगत निवेश अब भी सुस्त रफ्तार से आ रहा है। मगर पिछली दो-तीन तिमाहियों की तुलना में इसमें सुधार जरूर हुआ है।Ó

जब स्थापित क्षमता मांग पूरी करने के लिए नाकाफी होती हैं तो कंपनियां नए उत्पादन संयंत्र तैयार करने में लग जाती हैं। फिलहाल स्थापित क्षमता का करीब एक चौथाई हिस्सा अभी इस्तेमाल ही नहीं हो रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ऑर्डर बुक, भंडार एवं क्षमता उपयोगिता सर्वेक्षण के अनुसार 2022-23 की दूसरी तिमाही में क्षमता इस्तेमाल बढ़ा जरूर है।

सर्वेक्षण में कहा गया है, ‘वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी तिमाही के दौरान विनिर्माण क्षेत्र में क्षमता इस्तेमाल बढ़ा है और पहली तिमाही के 72.4 प्रतिशत से बढ़कर 74 प्रतिशत पर पहुंच गया। विभिन्न अवधियों के हिसाब से क्षमता इस्तेमाल वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी तिमाही में 20 आधार अंक बढ़कर 74.5 प्रतिशत तक पहुंच गया। 2022-23 की दूसरी तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में जितने ऑर्डर आए, वे पिछली तिमाही के आंकड़ों के बराबर ही थे मगर पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में इनमें खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई।Ó

मार्च में करीब 95,000 करोड़ रुपये मूल्य की परियोजाएं पूरी हो पाईं। सीएमआईई द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले साल मार्च तिमाही के मुकाबले यह 28 प्रतिशत और दिसंबर तिमाही की तुलना में 44 प्रतिशत कम रहीं। जो परियोजनाएं किसी न किसी कारणवश ठप पड़ चुकी हैं उनकी संख्या करीब-करीब वही रही।

मार्च तिमाही के मजबूत आंकड़े आगे शायद ही दोहराए जा सकें क्योंकि वृद्धि दर सुस्त पड़ रही है। सबनवीस ने कहा कि आर्थिक वृद्धि सुस्त पडऩे का असर स्वाभाविक रूप से कारोबार एवं उनकी विस्तार योजनाओं पर होगा।

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