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गुजरात में प्रयोगशाला में विकसित हीरे के प्रोत्साहित करने की पहल की सराहना

by Bhupendra Sahu

नयी दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुजरात सरकार द्वारा प्रयोगशाला में विकसित हीरे के उद्योग-व्यापार को प्रोत्साहित करने के गुजरात सरकार के कदमों की सराहना है। प्रयोगशाला में विकसित हीरा (एलजीडी) उद्योग पर राजधानी में एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्री गोयल ने गुजरात में हीरा विकसित करने वाली प्रयोगशालाओं को पांच साल के लिए बिजली शुल्क पर 100 प्रतिशत छूट की पेशकश का विशेष रूप से जिक्र किया।

श्री गोयल ने उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार द्वारा डलजीडी को विशेष प्रोत्साहन वाले क्षेत्र के रूप में चुना गया है। राज्य सरकार ने ‘औद्योगिक मशीनरी और उपकरणÓ और ‘विद्युत मशीनरी और उपकरणÓ उद्योग को भी विशेष प्रोत्साहन के क्षेत्र में लिया है। इसका लाभ राज्य में एलजीडी भट्टी निर्माताओं द्वारा उठाया जा सकता है।
गुजरात ने कृत्रिम हीरा उद्योग को ब्याज लागत और कर में रियायतें, एलजीडी के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए विकास एवं अनुसंधान कार्य में समर्थन, मौजूदा कार्यबल के लिए कौशल उन्नयन को प्रोत्साहित करने के लिए कौशल विकास सहायता आदि सहित कई प्रोत्साहनों की पेशकश है।
राज्य सरकार इस क्षेत्र की इकाइयों को श्रमिकों के मूल वेतन के 12 प्रतिशत तक या अधिकतम 1800 रुपये प्रति माह तक ईपीएफ में नियोक्ता के योगदान के बराबर प्रतिपूर्ति कर रही है। यह प्रोत्साहन 10 वर्षों की अवधि के लिए है।
बड़ी इकाइयों ब्याज सब्सिडी और शुद्ध एसजीएसटी की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति की पेशकश भी की जा रही है। राज्य में इस क्षेत्र की वृहद इकाइयां 20 वर्षों में पूंजीगत वस्तुओं पर कर के 100 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति का दावा कर सकती हैं। सरकार प्रौद्योगिकी अधिग्रहण के लिए लागत का 65 प्रतिशत या अधिकतम 50 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान कर रही है। बैठक में रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के सदस्य और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधिकारी उपस्थित थे।
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