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बदलते विश्व में घरेलू खनिज क्षेत्र को मजबूत बनाने के नए उपाय तलाशने पर जोर

by Bhupendra Sahu

नयी दिल्ली । राजधानी में खनिज और खनन क्षेत्र पर दो दिवसीय औद्योगिक सम्मेलन क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ समाप्त हुआ।केंद्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने समापन सत्र में इस क्षेत्र के सभी प्रतिभागियों को अपने खनिजों और खनन क्षेत्रों में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के तरीकों और साधनों का पता लगाने के साथ-साथ उनके विकास की गति बढ़ाने पर जोर देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनके सहयोग से ही भारत में खनन से मिलने वाले खनिजों और अन्य कीमती धातुओं का निर्यात बढ़ाया जा सकेगा।

सम्मेलन में इस उद्योग के विशेषज्ञों, औद्योगिक इकाइयों के प्रमुखों, नीति-निर्माताओं, हितधारकों और अन्य प्रतिनिधियों ने इस क्षेत्र से संबंधित विभिन्न विषयों, चुनौतियों और अवसरों पर विस्तार से चर्चा की। सम्मेलन में संकल्प लिया गया है कि खनिज और खनन क्षेत्र से संबंधित उद्योग के हितधारक इस क्षेत्र के विकस के लिए एक साझी दृष्टि विकसित करें।
खनन क्षेत्र के सरकारी उपक्रम एनएमडीसी और उद्योगमंडल फिक्की द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सम्मेलन के समापन सत्र में इस्पात मंत्रालय के सचिव संजय सिंह ने कहा कि भारत में 2030 तथा 2047 तक इस्पात उत्पादन क्षमता क्रमश: 30 करोड़ टन और 50 करोड़ टन तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इस्पात सचिव श्री सिंह ने कहा, इसका मतलब यह होगा कि अनुमानित लौह अयस्क के भंडार को संसाधनों में बदलना होगा क्योंकि तभी ये भंडार देश के नीति निर्माताओं द्वारा तय लक्ष्यों को को प्राप्त करने के लिए आदर्श होंगे।
नीति आयोग के सलाहकार कुंदन कुमार ने कहा कि भारतीय खानों और खनिज क्षेत्र के विकास और विस्तार और विविधीकरण के लिए नीतियां तैयार की जा रही हैं और कई को लागू भी किया जा चुका है।
एनएमडीसी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुमित देब ने समापन सत्र की अध्यक्षता करने हुए प्रतिभागियों और नीति निर्माताओं से इस क्षेत्र को अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता के लिए अपना समर्थन देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में अपने योगदान को अपने वर्तमान स्तर से करीब दो प्रतिशत तक काफी आसानी से बढ़ा सकता है।
आदित्य बिड़ला समूह की मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. इला पटनायक ने बदलते अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिदृश्य के मद्देनजर भारत जैसे देशों के लिए खोज और खनन क्षेत्रों पर विशेष रूप से पहले से अधिक ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया।
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