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रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरा रुपया, डॉलर के मुकाबले 79.98 तक लुढ़का

by Bhupendra Sahu

मुंबई। मुद्रा बाजार में भारतीय मुद्रा रुपये की गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। रुपये ने शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुलकर की। कारोबार खुलने के कुछ ही देर बाद रुपये में और गिरावट आई, जिसके कारण भारतीय मुद्रा ने डॉलर के मुकाबले 79.98 रुपये ने ऑल टाइम लो के नए रिकॉर्ड को टच कर लिया। हालांकि फिलहाल रुपया आज के लो लेवल से 12 पैसे की रिकवरी करके 79.86 के स्तर पर कारोबार करता नजर आ रहा है।

इंटर बैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपये ने आज एक बार फिर ओपनिंग के वक्त ही ऑल टाइम लो का नया रिकॉर्ड बनाया। आज रुपये ने डॉलर के मुकाबले 6 पैसे की कमजोरी के साथ 79.94 रुपये के रिकॉर्ड लो लेवल से कारोबार की शुरुआत की। कारोबार की शुरुआत होते ही मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग तेज हो गई जिसके कारण रुपया फिसल कर 79.98 के स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि थोड़ी देर में ही डॉलर की मांग में कमी आने और मुद्रा बाजार में डॉलर का फ्लो बढऩे के कारण रुपया कल के क्लोजिंग की तुलना में 5 पैसे और आज के लोएस्ट लेवल की तुलना में 15 पैसे की मजबूती के साथ 79.83 के स्तर पर भी पहुंचा। मामूली ऊंच-नीच के साथ फिलहाल रुपया डॉलर के मुकाबले 79.86 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
रुपये ने कल भी डॉलर के मुकाबले गिरावट का नया रिकॉर्ड बनाया था। भारतीय मुद्रा ने कल डॉलर के मुकाबले 25 पैसे की कमजोरी के साथ 79.88 रुपये के स्तर पर कारोबार का अंत किया था। साल 2022 में अभी तक रुपये की कीमत में डॉलर के मुकाबले करीब 7 प्रतिशत की कमजोरी आ चुकी है। सिर्फ जुलाई के महीने में ही डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में 1.80 रुपये की कमजोरी दर्ज की जा चुकी है। रुपये की गिरावट के कारण आयातित वस्तुओं की कीमत में लगातार बढ़ोतरी का दबाव बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रुपये को सहारा देने की कोशिश में देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव की स्थिति बनती जा रही है।
मार्केट एक्सपर्ट संजय गुप्ता के मुताबिक अमेरिका में महंगाई दर के आंकड़े जारी होने के बाद वहां के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का संकेत दिया गया है। इसकी वजह से डॉलर इंडेक्स में भी तेज उछाल के संकेत मिलने लगे हैं। डॉलर इंडेक्स पिछले 21 सालों के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुका है, जिसके कारण डॉलर की तुलना में दुनिया के ज्यादातर देशों की मुद्राओं का अवमूल्यन हुआ है।
इसी तरह मार्केट एक्सपर्ट मयंक मोहन का कहना है कि डॉलर इंडेक्स में आई तेजी के साथ ही रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादातर वस्तुओं की मांग में तेजी आई है। इसके साथ ही वैश्विक मंदी का खतरा भी मंडराता नजर आ रहा है। ऐसे में दुनिया भर के निवेशक डॉलर में निवेश करके अपना पैसा सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी निवेशक फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में हुई बढ़ोतरी के बाद दुनिया भर में किए गए अपने निवेश को वापस निकालने में जुट गए हैं।
मयंक मोहन के मुताबिक भारतीय बाजार से भी ये निवेशक लगातार बिकवाली करके अपना पैसा निकाल रहे हैं, जिसकी वजह से डॉलर की मांग तेज हुई है। इसका प्रत्यक्ष असर रुपये की कीमत में आई गिरावट के रूप में नजर आ रहा है। आपको बता दें कि आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने भी अपनी एक रिपोर्ट में वैश्विक परिस्थिति और घरेलू शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव को देखते हुए रुपये की कीमत में डॉलर के मुकाबले 83 रुपये तक की गिरावट आने की आशंका जताई है।
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