नई दिल्ली । स्थानीय मांग के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सरसों और सोयाबीन तेल-तिलहन की कीमतों में सुधार आया। जबकि मूंगफली तेल तिलहन, बिनौला, सीपीओ और पामोलीन तेल सहित लगभग सभी तेल-तिलहनों के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए। बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज बंद था जबकि शिकॉगो एक्सचेंज शुक्रवार रात में पौने दो प्रतिशत की बढ़त पर रहा था। सूत्रों ने कहा कि मंडियों में सरसों की आवक घटकर लगभग सवा चार लाख बोरी रह गई है और इधर निरंतर सरसों की आवक घटने लगी है। किसान अपनी जरुरत के हिसाब से ही सरसों का स्टॉक मंडियों में लायेंगे।
इसलिए सरकारी खरीद एजेंसियों को सरसों का भंडारण कर लेना चाहिये। आयातित तेलों के महंगा होने के कारण उनकी कमी को सरसों तेल और उसके रिफाइंड और अन्य देशी तेलों से फिलहाल पूरा किया जा रहा है लेकिन इसकी भी एक सीमा है। सूत्रों ने कहा कि हाल के दिनों में सरसों व अन्य फसलों के लिए किसानों को अच्छा दाम मिलने से किसान लाभान्वित हुए हैं और इसका प्रभाव तिलहन उत्पादन में वृद्धि से लगाया जा सकता है। सरकार को खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए शुल्क घटाने या बढ़ाने के बजाय तेलों के थोक बिक्री दर और खुदरा बिक्री दर की निगरानी बढ़ानी होगी। आम उपभोक्ताओं की शिकायत है कि बाजार में सरसों तेल लगभग 190 – 200 रुपये लीटर मिल रहा है लेकिन अगर थोक बिक्री दाम को देखा जाये तो उस हिसाब से खुदरे में सरसों तेल सारे खर्च और लाभ जोडऩे के बाद 165-168 रुपये लीटर से अधिक नहीं होना चाहिये। सभी खाद्य तेलों के मनमाने खुदरा मूल्य पर अंकुश लगाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि साधारण मांग होने के कारण सोयाबीन तेल तिलहन कीमतों में सुधार आया। सूत्रों ने कहा कि इंडोनेशिया का निर्यात खुलने से स्थितियों में विशेष फर्क की उम्मीद नहीं करनी चाहिये। सरकार को पूरा ध्यान देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर देना होगा तभी देश तिलहन उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा।
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