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गिरता रुपया बढ़ाएगा रोजगार संकट, फिर लौटने लगा छंटनी का दौर, नौकरी गंवाने का सता रहा डर

by Bhupendra Sahu

नई दिल्ली । डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट कारोबारियों के साथ रोजगार के मोर्चे पर भी मुश्किलें बढ़ानी शुरू कर दी है। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के बीच गुरुवार को रुपया 10 पैसे की गिरावट के साथ 77.72 प्रति डॉलर (अस्थायी) के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। रुपये की कमजोरी से पडऩे वाले असर को देखते हुए रत्न आभूषण क्षेत्र के साथ स्टार्टअप ने छंटनी की शुरुआत कर दी है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में इसका असर कपड़ा और अन्य क्षेत्रों पर भी हो सकता है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 77.72 पर कमजोर खुला। कारोबार के अंत में रुपया 77.72 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 10 पैसे की गिरावट को दर्शाता है। दिन में कारोबार के दौरान रुपया 77.76 के निचले स्तर तक गया। इसने 77.63 के उच्चस्तर को भी छुआ। बुधवार को रुपया 18 पैसे की गिरावट के साथ 77.62 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था। इक्रा की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया 79 के स्तर तक पहुंच सकता है।

ऐसी स्थिति में हालात और खराब हो सकते हैं।
सूरत में हीरा तराशने से जुड़ी कई कंपनियों ने 2.5 लाख कारीगरों को छुट्टी पर भेज दिया है। कंपनियों का कहना है कि वह रूस की कंपनी अलरोसा से कच्चा हीरा आयात करते हैं और फिर इसे तराश कर निर्यात करते हैं। अमेरिका ने अलरोसा पर प्रतिबंध लगा दिया है। जबकि दुनिया भर के हीरा आयात में उसकी 30 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में कंपनियों का कहना है कि उनके पास फिलहाल काम बंद करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है।
नौकरी गंवाने का सता रहा डर
सूरत के हीरा कारोबार में करीब 15 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है जो इस क्षेत्र में कुल रोजगार का करीब एक तिहाई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि छुट्टी एक बहाना है क्योंकि इस दौरान कोई भी भुगतान नहीं होगा। साथ ही आने वाले समय में कभी भी नौकरी से निकालने का फरमान जारी हो सकता है। रत्न आभूषण एवं निर्यात संवर्द्धन परिषद के उपाध्यक्ष विपुल शाह का का कहना है कि हीरा तराशने का काम 100 फीसदी आयात पर निर्भर है। ऐसे में इसमें किसी भी तरह की रुकावट रोजगार का संकट खड़ा सकता है।
रुपया कैसे बिगाड़ेगा रत्न-आभूषण क्षेत्र का खेल
भारत रत्न आभूषण का सबसे बड़ा आयातक और निर्यातक है। यही वजह है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। देश की कंपनियां पहले बिना तराशे रत्न-आभूषण का आयात करती हैं। यह डॉलर में होता है। डॉलर महंगा होने पर कारोबारियों को ज्यादा राशि खर्च करनी पड़ती है। वहीं डॉलर मजबूत होने पर निर्यातकों को लाभ तभी होता है जब बाजार में मांग होती है। जबकि मौजूदा समय में मांग भी घटी हुई है।
स्टार्टअप ने भी शुरू की छंटनी
पिछले कुछ वर्षों में जमकर रोजगार देने वाले स्टार्टअप भी अब छंटने करने लगे हैं। वेदांतू ने केवल मई में अब तक 600 से ज्यादा लोगों को नौकरी से निकाल चुका है। वहीं कार्स24 ने भी 600 लोगों की छंटनी का ऐलान किया है। एक आकलन के मुताबिक इस क्षेत्र में पांच हजार लोगों की छंटनी होने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टार्टअप में पैसे का फ्लो कम होने लगा है। 100 में से केवल 23 यूनिकार्न ही फायदे में हैं। ऐसे में निवेशक पैसे के सार्थक उपयोग का दबाव बना रहे हैं।
ब्याज दरों के बढऩे से रोजगार सृजन पर लगाम
दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों के ब्याज बढ़ाने के बाद आरबीआई को भी दरें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई ऐसा नहीं करता तो विदेशी निवेशकों द्वारा डॉलर की निकासी और तेज हो जाता जिससे रुपया और कमजोर जाता। लेकिन इससे कर्ज महंगा हो रहा है। इससे एमएसएमई, रियल एस्टेट सेक्टर पर रोजगार सृजन पर लगाम लगाने का दबाब बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई रोकने के उपायों से अर्थव्यस्था का चक्का रुकेगा तो रोजगार कैसे पैदा होंगे।
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