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भारतीय मूल के पराग अग्रवाल ट्विटर के बने नए सीईओ

by Bhupendra Sahu

नई दिल्ली । सोशल मीडिया साइट ट्विटर के सह संस्थापक जैक डोर्सी ने सीईओ के पद से इस्तीफा देकर कंपनी छोड़ दी है. उनकी जगह भारतीय मूल के पराग अग्रवाल को नियुक्त किया गया है. कौन हैं पराग अग्रवाल 37 साल के पराग अग्रवाल ट्विटर के नए सीईओ होंगे. वह जैक डोर्सी की जगह लेंगे जिन्होंने पद और कंपनी दोनों छोडऩे का ऐलान किया. इसके साथ ही दुनिया की सबसे नामी कंपनियों का नेतृत्व कर रहे भारतीयों की सूची में एक और नाम शामिल हो गया. पराग अग्रवाल ने पर्दे के पीछे से एकाएक इस अहम भूमिका में पदार्पण किया है. हालांकि संभव है कि उनकी सशक्त तकनीकी क्षमता और उनके नाम पर कोई विवाद ना होना ही उनके पक्ष में गया हो. क्यों चुने गए अग्रवाल भारतीय मूल के प्रवासी अग्रवाल अब तक कोई बहुत ज्यादा खबरों में नहीं रहे हैं. हालांकि वह 15 साल से ट्विटर में काम कर रहे थे और चार साल से कंपनी के चीफ टेक्निकल ऑफिसर थे लेकिन जैक डोर्सी, मार्क जकरबर्ग या ईलॉन मस्क की तरह हाई प्रोफाइल नहीं हैं. वॉल स्ट्रीट की निगाहें अब उत्सुकता से ट्विटर की ओर देख रही हैं क्योंकि ऐसी उम्मीद की जा रही है कि अग्रवाल कंपनी को इंटरनेट के अगले युग यानी मेटावर्स की ओर ले जाएंगे. सीएफआरए रीसर्च के विश्लेषक एंजेलो जीनो ने लिखा कि अग्रवाल एक सुरक्षित चयन हैं जिन्हें निवेशक पसंद करेंगे.

जीनो ने इस बात पर भी जोर दिया कि ट्विटर की हिस्सेदार कंपनी इलियट मैनेजमेंट कॉर्प ने डोर्सी को पद छोडऩे के लिए मजबूर किया था. इलियट ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि अग्रवाल और बोर्ड के नए अध्यक्ष ब्रेट टेलर इस अहम वक्त में कंपनी के लिए सही अगुआ हैं. टेलर बिजनेस सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी सेल्सफोर्स के सीओओ हैं. भारतीयों की फेहरिस्त पराग अग्रवाल उन भारतीयों की लंबी सूची में अगला नाम हैं जो सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं. उनमें गूगल की मुख्य कंपनी अल्फाबेट के सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नाडेला और आईबीएम के अरविंद कृष्णा शामिल हैं. पराग अग्रवाल ने आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई की है.
इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित स्टैन्फर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की. उसके बाद माइक्रोसॉफ्ट और याहू में इंटर्नशिप भी की. 2011 में उन्होंने ट्विटर में काम शुरू किया था. तब कंपनी में सिर्फ 1,000 कर्मचारी हुआ करते थे. पिछले साल के आखिर में कंपनी के 5,500 कर्मचारी थे. जल्दी ही अग्रवाल का नाम हो गया. 2017 में वह चीफ टेक्निकल ऑफिसर नियुक्त किए गए. वह कंपनी की आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग नीतियों के लिए जिम्मेदार रहे. बड़ी चुनौतियां यूं तो ट्विटर दुनिया के बड़े-बड़े लोगों जैसे राजनेताओं, पत्रकारों और मनोरंजन जगत की हस्तियों की पसंदीदा सोशल मीडिया प्रोफाइल है लेकिन ग्राहकों की संख्या के मामले में यह फेसबुक और यूट्यूब के अलावा नई वीडियो ऐप टिक टॉक से काफी पीछे रह गई है. ट्विटर के सिर्फ 20 करोड़ ऐसे यूजर हैं जो प्रतिदिन सक्रिय होते हैं. इसलिए पराग अग्रवाल के सामने चुनौतियां काफी बड़ी हैं. उन्हें तकनीकी विकास ही नहीं देखना है बल्कि राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों का भी सामना करना होगा. इनमें फेक न्यूज, ट्रोलिंग और मानिसक स्वास्थ्य पर असर जैसे गंभीर मुद्दे भी हैं. पराग अग्रवाल की एक चुनौती भारत सरकार के साथ बेहतर संबंध बनाना भी होगा. हाल के महीनों में कंपनी के भारत सरकार से रिश्ते खराब हुए हैं. कंपनी के भारत में प्रमुख को कई बार अधिकारियों का सामना करना पड़ा है और अब भारत सरकार के कई नेता ट्विटर की स्थानीय प्रतिद्वन्द्वी कू को समर्थन दे रहे हैं.
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