नईदिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) आज मेड इन इंडिया कोविड-19 वैक्सीन (कोवैक्सिन) को हरी झंडी दिखा सकता है. डब्ल्यूएचओ की टेक्नीकल कमेटी आज भारत बायोटेक के कोवैक्सिन को आपातकालीन उपयोग सूची (ईयूएल) में शामिल करने के मुद्दे पर बैठक करने वाला है. इससे पहले कमेटी दो बार कोवैक्सिन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक से स्पष्टीकरण मांग चुका है. बीते सप्ताह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के तकनीकी सलाहकार समूह ने भारत के स्वदेश निर्मित कोविड रोधी टीके ‘कोवैक्सीनÓ को आपातकालीन उपयोग की सूची में शामिल करने के लिए अंतिम लाभ-जोखिम मूल्यांकन करने के वास्ते भारत बायोटेक से अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगा था. तकनीकी सलाहकार समूह अब अंतिम मूल्यांकन के लिए आज यानी तीन नवंबर को बैठक करने वाला है.
इससे पहले हुई बैठक को लेकर डब्ल्यूएचओ ने कहा था, ‘तकनीकी सलाहकार समूह ने बैठक में फैसला किया कि टीके के वैश्विक उपयोग के मद्देनजर अंतिम लाभ-जोखिम मूल्यांकन के वास्ते निर्माता से अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगे जाने की जरूरत है.Ó यह दूसरी बार था जब डब्ल्यूएचओ ने भारत बायोटेक से स्पष्टीकरण मांगा था. वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि टीका सुरक्षित और प्रभावी है यह सुनिश्चित करने के लिए उसका पूरी तरह से मूल्यांकन करना होगा.
अब तक 6 टीकों को डब्ल्यूएचओ से मंजूरी मिल चुकी है. इसमें फाइजर/बायोएनटेक की कोमिरनेटी, एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड, जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन, मॉडर्न की एमआरएनए-1273, सिनोफार्म की बीबीआईबीपी-कोरवी और सिनोवैक की कोरोनावैक शामिल है.
हालांकि ऐसे कई देश हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाने और यात्रियों को अपने देशों में प्रवेश करने की अनुमति देने के लिए कोवैक्सिन को मंजूरी दी है. इन देशों में गयाना, ईरान, मॉरीशस, मेक्सिको, नेपाल, पराग्वे, फिलीपींस, जिम्बाब्वे, ऑस्ट्रेलिया, ओमान, श्रीलंका, एस्टोनिया और यूनान का नाम शामिल है. भारत बायोटेक के कोवैक्सीन और एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के कोविशील्ड भारत में व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले दो टीके हैं. ऑस्ट्रेलिया कोविशील्ड को पहले ही मान्यता दे चुका है.
बता दें कि, कोवैक्सीन विकसित करने वाले हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने अपने टीके की आपात उपयोग सूचीबद्धता के लिए 19 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य संगठन को ईओआई (रुचि की अभिव्यक्ति) प्रस्तुत की थी. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बीते रविवार को कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत जी-20 के नेताओं ने सहमति जताई है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को कोविड-19 टीकों की आपातकालीन उपयोग मंजूरी को लेकर प्रक्रिया को तेज करने के लिए मजबूत किया जाएगा. गोयल ने कहा कि नेताओं ने जी-20 शिखर सम्मेलन में ‘रोम घोषणापत्रÓ को अंगीकार किया और बयान स्वास्थ्य खंड के तहत एक बहुत ही मजबूत संदेश देता है, जिसमें सहमति जताई गई है कि कोविड-19 टीकाकरण दुनिया के लिए फायदेमंद है. प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को जी-20 के नेताओं से कहा था कि भारत अगले साल के अंत तक कोविड-19 रोधी टीके की पांच अरब से अधिक खुराक का उत्पादन करने के लिए तैयार है ताकि दुनिया को महामारी के खिलाफ लड़ाई में मदद मिल सके.