कोरबा। विजयादशमी का पर्व परंपरागत ढंग से हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। कोरबा शहर के साथ.साथ उपनगरीय क्षेत्र बालकोनगर, जमनीपाली, कुसमुंडा, बांकीमोंगरा के अलावा कटघोरा, दीपका, पाली, रजगामार और ग्रामीण अंचल में नागरिकों की समितियों के द्वारा आसुरी शक्तियों के प्रतीक जलाए गए। 2 वर्षों से कोरोना संक्रमण के कारण त्योहारों को अनमने तरीके से मनाते चले आ रहे लोगों ने इस बार अपेक्षाकृत अधिक उत्साह पूर्वक त्यौहार को रौनक भरे माहौल में मनाया। सुबह से ही सड़कों पर चहल-पहल बढऩे लगी थी जो शाम होते-होते और बढ़ गई। विभिन्न दुर्गा पूजा उत्सव समितियों के द्वारा पंडालों में विराजित मां दुर्गा की प्रतिमाओं का दर्शन करने के साथ लोगों ने खान-पान का लुत्फ उठाया। पुराना बस स्टैण्ड सहित अन्य स्थानों पर 5 से 10 फ़ीट ऊंचे पुतले का दहन कर प्रतीकात्मक तौर पर परंपरा का निर्वहन किया गया। बुधवारी, आरपी नगर फेस.1, आरएसएस नगर, 15 ब्लॉक, शहीद भगत सिंह कालोनी, पुरानी बस्ती कोरबा में रावण के पुतले लोगों के लिए कौतूहल और आकर्षण का केंद्र रहे, इसलिए कि विगत दो वर्ष पूर्व विशालकाय पुतलों का दहन किया जाता रहा। दहन से पहले पूजा और आतिशबाजी की गई। ढोल-ताशे की गूंज भी यहां सुनाई देती रही। पुतलों का दहन बाद समी के पत्ते आपस मे बांटे गए।
विजयदशमी त्योहार के मद्देनजर जिला और पुलिस प्रशासन के द्वारा व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा जहां विभिन्न आयोजन स्थलों पर मौजूद रहकर व्यवस्थाओं को देखा जाता रहा वहीं राजपत्रित पुलिस अधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के मार्गदर्शन और निर्देशन में थाना व चौकी प्रभारियों एवं पुलिस बल के जवानों, सीएएफ व बटालियन के जवानों द्वारा लगातार गश्त की जाती रही। यातायात के जवान व्यवस्था बनाने में जुटे रहे। जिले में विजयादशमी का आयोजन एक सप्ताह से भी अधिक समय तक की परंपरा कुछ वर्षों से बनी हुई है। इसके अंतर्गत मड़वारानी, कोहडिय़ा, बेला आदि क्षेत्रों में रावण के पुतले जलाए जाएंगे। वैसे भी जिले में कई सार्वजनिक आयोजन महीनों तक करने की परंपरा बनी हुई है।
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