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डिजिटल परिवर्तन और पेपरलेस न्याय व्यवस्था भविष्य के लिये महत्वपूर्ण और आवश्यक : सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत

by Bhupendra Sahu

भोपाल : भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश न्‍यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल परिवर्तन और पेपरलेस न्याय व्यवस्था भारतीय न्यायपालिका के भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक विषय है। उन्होंने कहा कि अदालतों की पहचान अब लाल कपड़ों में बंधी भारी-भरकम फाइलों से नहीं, बल्कि स्मार्ट तकनीक से होगी। कोविड-19 महामारी के दौर को एक ऐतिहासिक मोड़ बताते हुए उन्होंने कहा कि उस संकटकाल में वर्चुअल हियरिंग और ई-फाइलिंग से न्याय प्रणाली को नई दिशा मिली। सुप्रीम कोर्ट ने अब ‘मिसलेनियस डेट्स’ पर पूरी तरह वर्चुअल हियरिंग का निर्णय लिया है, जिससे वकीलों को घर बैठे दलीलें रखने की सुविधा मिलेगी। उन्‍होंने यह बात जबलपुर में महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा आयोजित “डिजिटल ट्रांसमिशन: एडवांसिंग पेपरलेस लीगल सिस्टम” विषय पर आयोजित विधिक व्याख्यान कार्यक्रम में कही।

मुख्य न्‍यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने अपने 37 वर्ष की आयु में महाधिवक्ता बनने के दौर को याद करते हुए बताया कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. अरुण जेटली के सहयोग से उन्होंने देश का पहला पूर्णतः कंप्यूटरीकृत महाधिवक्ता कार्यालय तैयार कराया था। अब लाइव स्ट्रीमिंग और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड ने न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई है।

न्‍यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने विशेष रूप से कहा कि सिक्किम की तरह मध्यप्रदेश भी पूर्णतः पेपरलेस बनने की दिशा में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ आगे बढ़ रहा है। इससे पर्यावरण संरक्षण को भारी संबल मिलेगा। देश के ग्रामीण व वरिष्‍ठजनों को ध्यान में रखते हुए तकनीक को ‘बाधा’ नहीं बल्कि ‘पुल’ बनना होगा। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की एआई कमेटी, न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने पर लगातार काम कर रही है।

मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने अयोध्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय और शाहबानो प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि जब अदालतें ऐसे युगांतरकारी फैसले देती हैं, तो लोकतंत्र सशक्त होता है। आज का समय न्याय व्यवस्था, लोकतंत्र और भारतीय मूल्यों के पुनर्जागरण का काल है।

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