रायपुर प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य के सभी जिलो में मत्स्य क्रांति की मजबूत नींव रखी जा रही है। इस योजना के माध्यम से किसानों एवं मछुवा परिवारों के जीवन में उल्लेखनीय और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। आधुनिक तकनीकों को अपनाकर मत्स्योत्पादन क्षमता में कई गुना वृद्धि हुई है, जिससे आय एवं रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।
आधुनिक तकनीकों से बढ़ा मत्स्योत्पादन
योजना के अंतर्गत केज कल्चर, पॉण्ड बायोफ्लॉक एवं नवीन तालाब निर्माण को प्रोत्साहित किया गया है। जिले के खदानों एवं जलाशयों में 21 केज इकाईयाँ स्थापित कर मत्स्यपालन का कार्य किया जा रहा है, जिससे सीमित जल संसाधनों में भी अधिक उत्पादन संभव हो पाया है।
1500 मछुवारों को मिला प्रशिक्षण एवं आवश्यक संसाधन
मछली पालन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी हेतु राजनांदगांव जिले के 1900 मछुवारों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसके साथ ही मछुवा परिवारों को मछली बीज, जाल, आइस बॉक्स, मोटर साइकिल एवं पिकअप वाहन जैसी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। किसान क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से मछुवारों को सस्ती एवं सुलभ ऋण सुविधा भी प्रदान की जा रही है।
मत्स्य बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर राजनांदगांव जिला
राजनांदगांव जिले में मत्स्य बीज उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु 2 नवीन हेचरी का निर्माण किया गया है, जिससे जिला अब मत्स्य बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर है। इसके परिणामस्वरूप जिले में मछली बीज उत्पादन में 20 प्रतिशत तथा कुल मत्स्योत्पादन में 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
बड़े पैमाने पर तालाब एवं संवर्धन पोखरों का निर्माण
मत्स्य बीज उत्पादन एवं संवर्धन हेतु जिले में 3 प्रक्षेत्रों की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त किसानों की निजी भूमि में 148 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 590.166 लाख रुपये की लागत से नवीन तालाब एवं संवर्धन पोखरों का निर्माण किया गया है।