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अमेरिका के फैसले का असर भारतीय शेयर बाजार पर-क्या आगे और गिर सकता है बाजार?

by Bhupendra Sahu

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह बड़े झटके से गुजरा. बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक गिर गया, जबकि निफ्टी लगभग दो महीने के निचले स्तर 24,600 के नीचे बंद हुआ. इस गिरावट की मुख्य वजहें रही अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत टैरिफ, लगातार विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली, और वैश्विक बाजारों में बढ़ती कमजोरी.
हाल ही में अमेरिका ने कई देशों से आयात पर 25 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिसमें भारत भी शामिल है. भारत के पारंपरिक निर्यात जैसे र प्रतिशत-आभूषण, चमड़ा और वस्त्र इस निर्णय से प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इन क्षेत्रों का शेयर बाजार में सीधा प्रतिनिधित्व सीमित है, इसलिए व्यापक प्रभाव की संभावना कम है. लेकिन बाजार की धारणा पर इसका नकारात्मक असर पड़ा है.
इस सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार भारतीय बाजारों से पूंजी निकासी की. यह ट्रेंड पिछले कुछ समय से बना हुआ है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा है. विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक विदेशी निवेशकों की वापसी नहीं होती, तब तक बाजार में मजबूती की संभावना सीमित रहेगी.
आईटी सेक्टर को सबसे ज्यादा झटका टीसीएस की छंटनी की खबर से लगा. वित्त वर्ष 26 तक कंपनी करीब 12,200 कर्मचारियों की छंटनी करेगी, जिससे टीसीएस के शेयरों में 5 प्रतिशत की गिरावट आई. ऑटो, फार्मा और धातु क्षेत्रों में भी 2-3 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई. केवल एफएमसीजी सेक्टर ही ऐसी स्थिति में स्थिर बना रहा, क्योंकि इसमें बाहरी झटकों से बचाव की क्षमता अधिक होती है.
निफ्टी इंडेक्स लगातार चौथे सप्ताह निचले स्तरों पर बना हुआ है. विश्लेषकों के अनुसार, अगर निफ्टी 24,600 के नीचे बंद होता है (जो हो चुका है), तो अगला समर्थन स्तर 24,442 और फिर 24,250 पर देखा जा सकता है. ऊपर की ओर, 24800 से 24950 तक प्रतिरोध के क्षेत्र हो सकते हैं.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा एक नया कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसमें कई देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने की बात कही गई है. इन टैरिफ की दरें 10 प्रतिशत से लेकर 41 प्रतिशत तक हो सकती हैं और यह अगले सात दिनों में प्रभाव में आ जाएंगी. इस कदम ने वैश्विक निवेशकों के बीच मुद्रास्फीति और विकास में गिरावट की आशंकाओं को जन्म दिया है, जिससे एशियाई, अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में 1 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई.
हालांकि अमेरिकी टैरिफ का सीधा असर सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों पर सीमित है, लेकिन निवेशकों की भावना और वैश्विक अनिश्चितता के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बने रह सकते हैं. निवेशकों को फिलहाल बचाव रणनीति अपनाते हुए मजबूत और रक्षात्मक क्षेत्रों (जैसे एफएमसीजी) में निवेश करने की सलाह दी जा रही है.
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