मुंबई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के निर्यात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार को भारी अस्थिरता देखने को मिली. यह टैरिफ आदेश 7 अगस्त 2025 से लागू होगा. चूंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इस फैसले ने निवेशकों में घबराहट पैदा कर दी है और बाज़ार में बिकवाली का माहौल बन गया है. शुक्रवार सुबह बाजार खुलते ही निफ्टी 50 में 33 अंकों की गिरावट देखी गई और यह 24,734.90 पर आ गया. वहीं बीएसई सेंसेक्स 111 अंकों की गिरावट के साथ 81,074.41 पर पहुंचा. इस गिरावट के पीछे सिर्फ अमेरिका का टैरिफ फैसला ही नहीं, बल्कि घरेलू स्तर पर भी कोई बड़ा आर्थिक प्रोत्साहन सामने न आना और कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे भी अहम कारण रहे.
ट्रंप के फैसले के बाद भारतीय उत्पाद अमेरिका में महंगे हो जाएंगे, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धा घटेगी. इससे निर्यात में गिरावट आने की आशंका है, जो सीधे तौर पर कंपनियों के राजस्व और मुनाफे को प्रभावित कर सकती है. निवेशक अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि यह स्थिति लंबी चली, तो विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल सकते हैं, जिससे गिरावट और गहराएगी.
एनएसई के अधिकतर सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में खुले. निफ्टी आईटी, फार्मा, मेटल और पब्लिक सेक्टर बैंकों में गिरावट दर्ज की गई. केवल एफएमसीजी सेक्टर ही थोड़ा स्थिर नजर आया. बैंक निफ्टी 56,100 के स्तर पर संघर्ष करता रहा और जानकारों के मुताबिक, अगर यह 55,700 से नीचे जाता है तो इसमें और कमजोरी आ सकती है.
ट्रंप का यह फैसला सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा. जापान, म्यांमार, दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान और अन्य एशियाई देशों पर भी टैरिफ बढ़ाया गया है. नतीजतन, जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग और ताइवान के प्रमुख इंडेक्स में भी कमजोरी देखने को मिली. इसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा है, क्योंकि विदेशी संकेत भी फिलहाल नकारात्मक बने हुए हैं.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट तब तक बनी रह सकती है जब तक सरकार की ओर से कोई बड़ा नीति सुधार या आर्थिक राहत पैकेज सामने नहीं आता. निवेशकों की उम्मीद है कि केंद्र सरकार घरेलू मांग को बढ़ाने, निजी निवेश को आकर्षित करने और एमएसएमई सेक्टर को राहत देने के लिए जल्द ठोस कदम उठाएगी.
डोनाल्ड ट्रंप का यह टैरिफ फैसला भारत के लिए केवल व्यापारिक नुकसान नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी पड़ा है. निवेशकों का भरोसा डगमगाया है और बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है. जब तक अमेरिका और भारत के बीच व्यापार संतुलन को लेकर स्पष्टता नहीं आती, और जब तक केंद्र सरकार कोई ठोस आर्थिक रोडमैप नहीं पेश करती, तब तक शेयर बाजारों की यह अस्थिरता बनी रह सकती है.