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प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी को किया तलब

by Bhupendra Sahu

0-17 हजार करोड़ के लोन धोखाधड़ी से जुड़ा है केस
नई दिल्ली,01 अगस्त। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी को उनके समूह की कंपनियों के खिलाफ कथित 10 हजार करोड़ के लोन धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में पूछताछ के लिए 5 अगस्त को तलब किया है. आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी है. वहीं, इससे पहले निदेशालय ने अनिल अंबानी के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी. सूत्रों ने बताया कि 66 वर्षीय अंबानी को दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है, क्योंकि मामला यहीं दर्ज किया गया है.
उन्होंने बताया कि एजेंसी उनके बयान दर्ज करने के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उनका बयान दर्ज करेगी. यह समन संघीय एजेंसी द्वारा पिछले हफ़्ते उनके व्यावसायिक समूह की कई कंपनियों और अधिकारियों के खिलाफ छापेमारी के बाद आया है, 24 जुलाई को शुरू हुई यह छापेमारी तीन दिनों तक चली थी. जानकारी के मुताबिक अनिल अंबानी के मुंबई में 35 से अधिक परिसरों पर तलाशी ली गई, तथा ये परिसर 50 कंपनियों और 25 लोगों के थे, जिनमें अनिल अंबानी समूह की कंपनियों के कई अधिकारी भी शामिल थे.
ईडी के सूत्रों ने कहा था कि जांच मुख्य रूप से 2017-2019 के बीच अंबानी की समूह कंपनियों को यस बैंक द्वारा दिए गए लगभग 3,000 करोड़ रुपये के अवैध ऋण डायवर्जन के आरोपों से संबंधित है. समूह की दो कंपनियों, रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया था कि वे कार्रवाई को स्वीकार करते हैं, लेकिन छापों का उनके व्यावसायिक संचालन, वित्तीय प्रदर्शन, शेयरधारकों, कर्मचारियों या किसी अन्य हितधारकों पर बिल्कुल कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. कंपनियों ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) या रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) के लेनदेन से संबंधित आरोपों से संबंधित प्रतीत होती हैं, जो 10 साल से अधिक पुराने हैं.
सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसी ने पाया है कि लोन दिए जाने से ठीक पहले, येस बैंक के प्रमोटरों को उनके व्यवसाय में धन प्राप्त हुआ था. एजेंसी रिश्वत और लोन के इस गठजोड़ की जांच कर रही है. सूत्रों ने कहा कि ईडी इन कंपनियों को येस बैंक द्वारा ऋण स्वीकृतियों में घोर उल्लंघनों के आरोपों की भी जांच कर रहा है, जिसमें पिछली तारीख के क्रेडिट अनुमोदन ज्ञापन और बैंक की क्रेडिट नीति का उल्लंघन करते हुए बिना किसी उचित परिश्रम/क्रेडिट विश्लेषण के प्रस्तावित निवेश जैसे आरोप शामिल हैं.
वहीं, सूत्रों ने यह भी बताया कि एजेंसी कमजोर वित्तीय स्थिति वाली संस्थाओं को दिए गए लोन, कर्जों के उचित दस्तावेजीकरण और उचित परिश्रम की कमी, समान पते वाले उधारकर्ताओं और उनकी कंपनियों में समान निदेशकों आदि के कुछ मामलों की भी जांच कर रही है. उन्होंने बताया कि धन शोधन का यह मामला सीबीआई की कम से कम दो प्राथमिकियों और राष्ट्रीय आवास बैंक, सेबी, राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) तथा बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा ईडी के साथ साझा की गई रिपोर्टों से उत्पन्न हुआ है. यह भी पता चला है कि इन रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि बैंकों, शेयरधारकों, निवेशकों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों को धोखा देकर सार्वजनिक धन को दूसरी जगह ले जाने या गबन करने की एक सुनियोजित और सोची-समझी योजना थी.
केंद्र सरकार ने हाल ही में संसद को सूचित किया था कि भारतीय स्टेट बैंक ने अंबानी के साथ-साथ आरकॉम को भी धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत किया है और वह सीबीआई में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में भी है.
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