रायपुर । ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार अंतर्गत दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा ‘लखपति दीदी बनाने की दिशा में’ विषय पर तीन दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला के अंतिम दिवस दिनांक 11 जुलाई 2025 को राजधानी रायपुर में प्रदेश भर की चयनित लखपति दीदियों ने अपने संघर्ष, मेहनत व आजीविका से आत्मनिर्भर बनाने की कहानियों, परिचर्चा सत्र का आयोजन हुआ। विदित हो कि उक्त कार्यशाला का शुभारंभ ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव शैलेष कुमार, सूक्ष्म व लघु उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव एस सी एल दास वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया था।
‘लखपति दीदी कार्यशाला’ के अंतिम दिन, छत्तीसगढ़ की दीदियों ने साझा की अपनी सफलता की कहानियाँ!
तीन दिवसीय लखपति दीदी क्षेत्रीय कार्यशाला के अंतिम दिन छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आई लखपति दीदियों ने अपनी सफलता की कहानियाँ और उद्यमशीलता की यात्रा सभी प्रतिभागियों के साथ साझा की।
नगपुरा चंदखुरी की चंद्रकली वर्मा दीदी, जिन्हें प्रधानमंत्री द्वारा ‘नमो ड्रोन दीदी’ के रूप में सम्मानित किया गया है, ने बताया कि उन्होंने ग्वालियर से ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया और 2025 के लिए 800 एकड़ की बुकिंग कर ली है, जहाँ वे प्रति एकड़ 300 की दर से सेवा दे रही हैं।
आरंग की नागेश्वरी वर्मा दीदी ने बताया कि बिहान से जुड़कर उन्होंने मुर्गी पालन शुरू किया, जिससे उन्हें सालाना 1.5 लाख की आय होती है। उन्होंने बताया कि बिहान के सहयोग से वे अब आत्मनिर्भर हैं और परिवार की आर्थिक ज़रूरतों में सहयोग कर रही हैं। दंतेवाड़ा की निकिता मरकाम दीदी ने भी अपनी यात्रा साझा की—बिहान से जुड़कर उन्होंने किराना दुकान और सब्जी उत्पादन शुरू किया। इस वर्ष उन्हें सब्जी से 2 लाख और आम-जामुन से ₹1 लाख का लाभ हुआ। आज उनकी सालाना आय ₹3 लाख हो चुकी है और अब वे करोड़पति बनने का सपना देख रही हैं। इन सभी कहानियों ने यह संदेश दिया कि सशक्त महिला ही समृद्ध गांव की नींव है।