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फूड इंडस्ट्री के उद्योगपतियों से रूबरू हुए फूड टेक्नोलॉजी के विद्यार्थी

by Bhupendra Sahu

रायपुर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत संचालित खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में नई शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत बी.टेक फूड टेक्नालॉजी के विद्यार्थियों को उद्योग जगत की आवश्यकताओं तथा संभावनाओं से रूबरू कराने के लिए प्रथम इंडस्ट्री एकेडेमिया आयोजित की गई। इसमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्योगों जैसे इन्डस मेगा फूड पार्क, गोयल फूड्स, आकृति सुपर स्नेक्स, मनोरमा इंडस्ट्री लिमिटेड, केपस आईसक्रीम, सी जी सोया फूड्स, देवकान फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, अजय फूड्स, रामांजली आर्गेनिक्स, अमूल, साई सदन फूड प्रोसेसिंग, क्रिस्पस क्राप डिलाईट्स प्राइवेट लिमिटेड, बोंजेलो आदि के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस एकेडेमिया में विभिन्न विषयों जैसे बायोकेमेस्ट्री, बायोटेक्नोलॉजी, फूड टेक्नॉलाजी, फूड इंजीनियरिंग, डेयरी इंजीनियरिंग, माइक्रो बायोलाजी, कृषि व्यवसाय प्रबंधन, इंजीनियरिंग केमेस्ट्री, इलेक्ट्रिल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर साइंस आदि के विशेषज्ञ शामिल हुए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने अपने उद्बोधन में उद्योगों को शिक्षा संस्थानों से जोड़कर कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने उद्योगों से फूड टेक्नालॉजी के क्षेत्र में होने वाले परिवर्तन को ध्यान में रखकर नए शोध करने की वकालत की। साथ ही खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही जिससे कच्चा माल स्थानीय स्तर पर प्राप्त किया जा सके। उन्होंने फूड इन्डस्ट्री में नए मिलेट बेस्ड उत्पादों के निर्माण पर जोर दिया। उल्लेखनीय है कि खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय ने सन 2024-25 से नई शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की छठवीं डीन्स समिति की रिपोर्ट के आधार पर बी.टेक फूड टेक्नोलाजी के नये सिलेबस के अनुरूप पाठ्यक्रम में परिवर्तन किये हैं जिनमें फूड इंडस्ट्रीज के सहयोग से स्कील डेवलपमेंट कार्यक्रम, फूड इंडस्ट्रीज में एक समेस्टर इंन्टर्नशिप तथा फूड इंडस्ट्रीज के सहयोग से आवश्यक इंडस्ट्री रेडी मानव संसाधन तैयार करना शामिल है। फूड टेक के चार वर्षीय पाठ्यक्रम पर चर्चा के दौरान इंडस्ट्री विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों को आधारभूत तकनीकी ज्ञान देते हुए सॉफ्ट स्किल में प्रशिक्षित किया जाये। प्रायोगिक विषयों में ज्यादा ध्यान देकर विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों में विकसित करने हेतु संस्थान को सलाह दी गई।

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