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राहुल गांधी अमेरिका में बाहरी ताकतों से मिलकर क्या संदेश देना चाहते हैं : स्मृति ईरानी

by Bhupendra Sahu

नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर एक बार फिर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी के अमेरिका दौरे को सवालों के घेरे में लाकर खडा कर दिया। स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गांधी अपने अमेरिका दौरे के दौरान जिस सुनीता विश्वनाथ नामक महिला से मिल रहे हैं, वो जॉर्ज सोरोस द्वारा फंडेड है। इस महिला से राहुल गांधी क्या बात कर रहे थे? इसका खुलासा सिर्फ राहुल गांधी कर सकते हैं।स्मृति ईरानी ने आगे यह भी कहा कि जॉर्ज सोरोस भारत में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी सरकार को हटाना चाहते हैं। ऐसी क्या मजबूरी थी कि राहुल गांधी ने जॉर्ज सोरोस की एक सहयोगी के साथ अमेरिका में बैठक की। राहुल गांधी उन लोगों से मेलजोल क्यों बढ़ा रहे हैं जिन्हें सोरोस से फंड मिलता है। स्मृति ईरानी ने यह भी कहा कि यह भी स्पष्ट है कि यह एकमात्र सोरोस कनेक्शन नहीं है। जॉर्ज सोरोस और उनके द्वारा फंडेड संगठनों का राहुल गांधी से मेल-जोल नया नहीं बल्कि पुराना है।

ओपन सोसायटी के ग्लोबल अध्यक्ष सलील सेठी, जो जॉर्ज सोरोस के संस्थान के साथ हैं। यह राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में थे।स्मृति ईरानी ने कहा कि अपने राजनीतिक सफर में आज तक ऐसे कोई शख्स नहीं देखा, जो सत्ता के लिए ऐसे लोगों से मिल जाए, जो हिंदुस्तान की व्यवस्थाओं को उखाड़ फेंकने का ऐलान कर चुका हो। जॉर्ज सोरोस और सुनीता विशवनाथ से पूरी जनता वाकिफ है। क्या राहुल गांधी नहीं जानते? यह सवाल मेरा इसलिए नहीं है, कि मैं एक भाजपाई हूं। मैं यह सवाल देश के हर नागरिक से पूछती हूं कि राहुल गांधी भारत विरोधी ताकतों से मिलकर क्या संदेश देना चाहते हैं। जब जार्ज सोरेस के इरादे हर हिन्दुस्तानी को पता है तब भी ऐसी क्या मजबूरी थी कि राहुल गांधी ने जॉर्ज सोरेस के साथ काम करने वाले सुनीता विष्वनाथ के साथ बैठक की।पब्लिक डोमेन में यह जानकारी भी उपलब्ध है कि 4 जुन को राहुल गांधी की न्यूयार्क के कार्यक्रम में रजिस्ट्रेशन के लिए एक व्यक्ति का नाम और नम्बर दिया गया।

उस व्यक्ति के असांरी की इस्लामिक सर्किल ऑफ नार्थ अमेरिका से संबंध है।इस्लामिक सर्किल ऑफ नार्थ अमेरिका के बारे में 28 फरवरी 2019 को यूएस कांग्रेस के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटीव में एक प्रस्ताव के संबंध में कहा गया कि इस्लामिक सर्किल ऑफ नार्थ अमेरिका का संबंध जमात-ए-इस्लामिक से है।ऐसा क्यूं है कि पब्लिक डोमेन में संपर्क और संबंध जमात-ए-इस्लामिक से संबंधित संगठन से सहायता लेने की जरूरत कांग्रेस को आन पड़ी?जॉर्ज सोरेस और उसके द्वारा फंडेड संगठनों का राहुल गांधी से ताल्लुक कोई नया नहीं, बल्कि पुराना हो।एक और प्रकाशन में भी यह जानकारी सामने आयी है, और तस्वीर इंटरनेट पर उपलब्ध है। ओपेन ग्लोबल सोसायटी के अध्यक्ष सलील शेट्टी ने जॉर्ज सोरेस की संस्थान के साथ राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा की है।जॉर्ज सोरेसा डंके की चोट पर कह रहे हैं कि वे हिन्दुस्तान की लोकतांत्रिक ढांचे के अभिन्न अंग उसके सरकार को गिराना चाहते हैं।

ऐसे संगठन और उससे सम्बद्ध लोगों के साथ गांधी खानदान अपने रिश्तो को क्यू मजबूत कर रहा है।इस विषय को उठाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने एक एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर का निश्चित रूप से राजनीतिक स्वरूप देश की जनता को समझ आती है। जून का महीना है, आपातकाल की याद निश्चित रूप से ताजा करते हुए गांधी खानदान ने पुन प्रमाण दिया है कि चाहे प्रदेश में सत्ता आ जाए तो सत्य को दबाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं।सत्य यह है कि राहुल गांधी ने जिनका सहारा लेकर अमेरिका में मीटिंग की है, उनका संबंध जमात-ए-इस्लामिक के साथ है। राहुल गांधी जिनके साथ अमेरिका में बैठक की है उनका संबंध जॉर्ज सोरेस है। राजनीति नहीं, बल्कि राज नीति की दृष्टि से सोचे तो यह सवाल वाजिब है। जो व्यक्ति कहता है कि भारत की लोकतांत्रिक सरकार को किसी भी कीमत पर उखाड़ फेंकेंगे। एक विदेशी हमारे देश के बारे में यह कहता है। ये रिश्ता क्या कहलाता है। मेरे जीवन में कभी नहीं देखा जो सत्ता के लिए इतना मोहित हो कि उनसे हाथ मिलाए जो जिनका संबंध जमात ए इस्लामिक से है। कोई सत्ता के लिए इतना मोहित हो कि उनसे जुड़े लोगों के साथ बैठक करे, जो देश की लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने का ऐलान करे।
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