नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक ने भले ही अपने मुद्रा प्रबंधन के तहत 2000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर करने का फैसला किया हो, लेकिन इस कदम से विभिन्न वृहद आर्थिक मानदंडों पर सुधार की संभावना है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि 2,000 रुपये के बैंक नोटों को वापस लेने से जमा, क्रेडिट और खपत पर काफी असर पड़ेगा। इसमें कहा गया है कि उपभोग मांग में 55,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, “2000 रुपये के नोट को वापस लेने का एक बड़ा फायदा खपत की मांग में तत्काल तेजी आना हो सकता है। हमारे अनुमान के मुताबिक उपभोग मांग में 55,000 करोड़ रुपये का इजाफा हो सकता है।” बैंक ने कहा कि चूंकि नोटबंदी के विपरीत बैंक नोट वैध मुद्रा बना रहेगा, इसलिए खपत में तेजी देखी जा सकती है।
उच्च मूल्य की वस्तुओं जैसे सोना, आभूषण, एसी, मोबाइल फोन और अचल संपत्ति पर खर्च किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, पेट्रोल पंपों पर नकद लेनदेन में तेजी से वृद्धि हुई है, कई लोग अपने 2,000 रुपये के बैंक नोटों को वहां खर्च कर रहे हैं। रिपोर्ट में ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (एआईपीडीए) के हवाले से कहा गया है कि पेट्रोल पंपों पर बिक्री में डिजिटल भुगतान की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत थी, जो घटकर 10 प्रतिशत रह गई है।